जमशेदपुर: ब्रह्मर्षि विकास मंच के अध्यक्ष और महासचिव के नामों की हालिया घोषणा को लेकर संगठन के भीतर तीखा विवाद सामने आया है. मंच के संस्थापक महासचिव राजकिशोर सिंह ने सोमवार को संवाददाता सम्मेलन कर इस घोषणा को पूर्णतः अनैतिक, अलोकतांत्रिक और अवैध करार दिया है.

राजकिशोर सिंह ने कहा कि पदाधिकारियों के चयन की प्रक्रिया में न तो कोई चुनाव कराया गया और न ही किसी प्रकार की पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई गई. उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व अध्यक्ष और पूर्व महासचिव द्वारा पूर्वनिर्धारित तरीके से मनमानी मनोनयन कर संगठन पर नियंत्रण बनाए रखने का प्रयास किया गया है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अपने-अपने रिश्तेदारों को पद पर बैठाकर समाज को केवल वोट बैंक तक सीमित रखने की मानसिकता के तहत यह पूरी प्रक्रिया अपनाई गई. इस कारण समाज के योग्य, शिक्षित और सक्रिय लोगों को न तो संगठन में जिम्मेदारी मिल पा रही है और न ही राजनीतिक अवसर.
संस्थापक महासचिव ने कहा कि संभावित उम्मीदवारों को न तो किसी तरह की सूचना दी गई और न ही संचालन समिति ने उनसे संवाद करने की कोई पहल की. रायशुमारी किससे और किस आधार पर की गई, इसकी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई, जो पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करती है.
राजकिशोर सिंह ने इसे संस्थापक अध्यक्ष स्वर्गीय केके. सिंह, स्वयं उनके और पूरी पुरानी कमेटी की छवि को धूमिल करने का सुनियोजित प्रयास बताया. उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया ब्रह्मर्षि समाज की लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है. संवाददाता सम्मेलन में मौजूद सभी संभावित उम्मीदवारों ने समाज से अपील की कि ब्रह्मर्षि समाज को एकजुट और सशक्त बनाते हुए लोकतांत्रिक तरीके से निष्पक्ष चुनाव कराया जाए. उन्होंने मांग की कि ऐसे अध्यक्ष और महासचिव का चयन हो, जिनके पास समाज को आगे ले जाने का स्पष्ट विजन और क्षमता हो.
इस अवसर पर पवन सिंह, सत्येंद्र सिंह, राजेश सिंह रविनंदन, मिथिलेश चौधरी, जय कुमार और विकास चंद्रा सहित अन्य उम्मीदवार उपस्थित थे.

