आदित्यपुर: सरायकेला जिले में संगठित अपराध पर लंबे समय तक प्रभावी नियंत्रण के बाद एक बार फिर आदित्यपुर थाना क्षेत्र में आपराधिक गिरोहों की गतिविधियां तेज होती नजर आ रही हैं. पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार लुणायत के नेतृत्व में जिस तरह से अपराधियों पर नकेल कसी गई थी, हालिया घटनाएं उसी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं. शुक्रवार को आदित्यपुर थाना क्षेत्र के शर्मा बस्ती में हुई फायरिंग और चापड़बाजी की घटना ने न सिर्फ स्थानीय लोगों में दहशत फैलाई, बल्कि पुलिस की तत्परता और थानास्तर की कार्यशैली को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है.


हालात को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो आपराधिक गुटों के बीच वर्चस्व की यह लड़ाई गैंगवार में तब्दील हो सकती है. पूरा मामला कुख्यात विक्की नंदी गिरोह और सागर लोहार गिरोह से जुड़ा बताया जा रहा है. दोनों गुट पुलिस के दबाव के चलते लगभग एक वर्ष से शांत थे, लेकिन अब एक बार फिर इनके बीच टकराव की स्थिति बनती दिख रही है. शर्मा बस्ती की घटना को इसी आपसी संघर्ष की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है.
घर में घुसकर हमला, फायरिंग और तोड़फोड़ के आरोप
आरोप है कि राहुल पंडित ने अपने गुर्गों के साथ दीपक मिश्रा और दीपू मिश्रा के घर में घुसकर चापड़ से जानलेवा हमला किया. इस दौरान गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई और विक्की नंदी के नाम पर रंगदारी मांगने के उद्देश्य से हवाई फायरिंग की गई. हमले में दीपक मिश्रा घायल हुआ है.
पुलिस की पूर्व कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल.
इस पूरे मामले में पुलिस की भूमिका इसलिए भी सवालों के घेरे में है क्योंकि दो दिन पहले राहुल पंडित के घर के बाहर खड़ी स्कॉर्पियो वाहन संख्या JH 05U-1899 में तोड़फोड़ की घटना हुई थी. इससे पहले 18 दिसंबर 2025 को राहुल पंडित ने दीपक और दीपू मिश्रा द्वारा धमकी दिए जाने को लेकर थाना में आवेदन दिया था. इन दोनों मामलों में पुलिस की कार्रवाई को लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं.
कुणाल नंदी ने आरोपों का किया खंडन
घटना के बाद विक्की नंदी के भाई कुणाल नंदी ने सभी आरोपों का खंडन किया है. उन्होंने कहा है कि राहुल पंडित और मिश्रा भाइयों के बीच चल रहे विवाद से उनका कोई लेना- देना नहीं है. उन्होंने पुलिस को जांच में हर संभव सहयोग देने की बात कही है और कहा है कि यदि यह साबित होता है कि उन्होंने रंगदारी मांगी है या फायरिंग करवाई है तो कानून की सजा स्वीकार होगी.
पुरानी रंजिश में क्यों घसीटा जा रहा विक्की नंदी का नाम
घटना में विक्की नंदी का नाम सामने आने के पीछे पुराने आपराधिक विवाद की पृष्ठभूमि बताई जा रही है. पिछले वर्ष कल्पनापुरी में हुए विवेक सिंह हत्याकांड में दीपक और दीपू मिश्रा का नाम सामने आया था. दीपक और दीपू मिश्रा का संबंध बबलू दास गिरोह से बताया जाता है, जबकि विवेक सिंह विक्की नंदी का करीबी था. विक्की नंदी का बड़ा भाई कुणाल उर्फ बिट्टू नंदी इस हत्याकांड का गवाह है. इसी कारण बार- बार विक्की नंदी को विवाद में घसीटने की कोशिश किए जाने की बात कही जा रही है.
एसपी की सख्ती से टूटा था अपराध का नेटवर्क, फिर उठ रहे सवाल, क्या थानास्तर पर ढील बन रही है, कारण !
उल्लेखनीय है कि आदित्यपुर में लंबे समय तक शांति कायम रहने के पीछे पुलिस अधीक्षक मुकेश कुमार लुणायत की सख्त रणनीति रही है. पदभार संभालते ही उन्होंने कुख्यात अपराधी कार्तिक मुंडा के संगठित गिरोह को खत्म किया. खुफिया कार्रवाई के दौरान जमशेदपुर के कदमा स्थित एक अपार्टमेंट में घिरे कार्तिक मुंडा की छलांग के दौरान मौत हो गई थी. इसके बाद संतोष थापा को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया. सागर लोहार जैसे अपराधियों को अन्य जेलों में स्थानांतरित किया गया. बबलू दास, विक्की नंदी, बिट्टू नंदी, संतोष महतो, राममणि कुशवाहा, दीपक मिश्रा, दीपू मिश्रा, बाबू दास, अज्जू थापा, पेटू प्रमाणिक, मोती बिसोई, टुना सिंह और शेरू जैसे अपराधियों को जेल भेजा गया, जिससे जिले में अपराध पर प्रभावी रोक लगी. जेल से निकलेने के बाद हर अपराधी किसी दूसरे धंधे की ओर शिफ्टिंग होने की जुगत में लग गया. हालिया घटनाक्रम यह संकेत दे रहा है कि कहीं न कहीं थानास्तर पर सतर्कता में कमी आई है. यदि समय रहते स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया तो यह चिंगारी बड़े टकराव में बदल सकती है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस पूरे घटनाक्रम को हवा देने वाला असली चेहरा कौन है, जिसकी पहचान करना अब पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गया है.

