जामताड़ा/ Yogesh Kumar जिले के फतेहपुर प्रखंड अंतर्गत ग्राम बनगढ़ी निवासी मनीरुद्दीन अंसारी (उम्र लगभग 70 वर्ष), जो बीते करीब एक माह से लापता थे, उनका शव गुरुवार को दुमका जिले के मसलिया थाना क्षेत्र के गोमरू पहाड़ इलाके से बरामद किया गया. शव मिलने की सूचना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और गांव में मातम पसर गया.

परिजनों के अनुसार मनीरुद्दीन अंसारी की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं रहती थी. वे 1 दिसंबर 2025 को बिना बताए घर से निकले थे और फिर वापस नहीं लौटे. परिजनों ने आसपास के इलाकों, रिश्तेदारों और संभावित स्थानों पर लगातार खोजबीन की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला. बाद में स्थानीय थाना में गुमशुदगी की लिखित सूचना भी दी गई थी. गुरुवार को गोमरू पहाड़ क्षेत्र में शव पड़े होने की सूचना ग्रामीणों ने पुलिस को दी. सूचना पर मसलिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को बुलाया गया.

परिजनों ने घटनास्थल पर शव की पहचान मनीरुद्दीन अंसारी के रूप में की. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा किया और पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू की. प्रारंभिक जांच में किसी आपराधिक साक्ष्य की पुष्टि नहीं हुई है.
यह घटना न केवल एक परिवार की व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि मानसिक रूप से अस्वस्थ लापता व्यक्तियों की तलाश में प्रशासनिक तंत्र की सीमाओं को भी उजागर करती है. एक माह तक लापता रहने के बावजूद यदि बुजुर्ग का शव दूसरे जिले के पहाड़ी इलाके से मिलता है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या खोज अभियान पर्याप्त और समयबद्ध था. ऐसे मामलों में जिला स्तर पर समन्वित खोज अभियान, तकनीकी निगरानी और सीमावर्ती थाना क्षेत्रों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता है. यदि समय रहते व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया गया होता, तो संभव है कि बुजुर्ग की जान बचाई जा सकती. यह मामला प्रशासन के लिए एक चेतावनी है कि गुमशुदगी की शिकायतों को केवल औपचारिकता न मानते हुए संवेदनशीलता और तत्परता से कार्रवाई की जाए.

