आदित्यपुर: सरायकेला- खरसावां जिला में प्रशासनिक पदाधिकारियों के भ्रमजाल के कारण जमीन विवाद से जुड़े मामले पेचीदा होते जा रहे हैं. इस वजह से पीड़ित लोगों को कोर्ट कचहरी के चक्कर काटने पड़ रहे हैं जबकि इंसाफ के नाम पर प्रशासनिक अधिकारी लोगों का दोहन कर रहे हैं. चाहे नगर निगम का मामला हो या अंचल प्रशासन का. रसूखदारों का हर काम हो रहा है जबकि आम लोग कार्यालयों का चक्कर काट रहे हैं.

ताज़ा मामला आदित्यपुर में स्थापित आकाशवाणी केंद्र के जमीन से जुड़ा है. दरअसल आकाशवाणी के बाउंड्री से बाहर एक पार्क है जिसे दावा किया जा रहा था कि उस जमीन का स्वामित्व आयडा (जियाडा) का है मगर मामले में चौंकाने वाला तथ्य तब सामने आया ज़ब राजीव कुमार नामक व्यक्ति ने उक्त जमीन पर अपनी दावेदारी पेश करते हुए जमीन की घेराबंदी शुरू की. सरकारी तंत्र होने के नाते आकाशवाणी प्रबंधन की शिकायत पर पुलिस ने काम रुकवा दिया और घेराबंदी के लिए गाड़े गए पिलर को उखाड़ दिया. इस सम्बंध में ज़ब थाना प्रभारी विनोद तिर्की से पूछा गया तो उन्होंने शिकायत कर्ता का नाम नहीं बताया और कहा राजीव को पेपर के साथ बुलाया गया है पेपर देखने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.

इधर राजीव कुमार ने बताया कि उन्हें डराया जा रहा है. पिछले कई वर्षो से मैं अपने निजी संपत्ति को हासिल करने के लिए आयडा, आवास बोर्ड, अंचल कार्यालय और नगर निगम की दौड़ लगा रहा हूं मगर मुझे इंसाफ नहीं मिल रहा है. उल्टा मुझे डराया- धमकाया जा रहा है. उन्होंने बताया कि जिस जमीन पर आकाशवाणी दावा कर रहा है दरअसल यह उसकी निजी संपत्ति है जिसे उसके पिता ने 5/ 7/ 1982 को खरीदा था जिसका डीड संख्या 2773/ 2794 है. उन्होंने बताया कि उसके जमीन का कुल रकबा 15.5 डिसमिल है जिसमें बगैर अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी किए 8.5 डेसिमल पर अवैध रूप से पार्क का निर्माण कर दिया गया है जबकि 7 डिसमिल जमीन आकाशवाणी ने अपनी बाउंड्री के कब्जे में ले लिया है जिसमें गैरेज का निर्माण कराया है.
राजीव के अनुसार पिछले डीसी रवि शंकर शुक्ला ने मामले पर गंभीरता दिखाते हुए अंचल कार्यालय को जांच करने का जिम्मा सौंपा था अंचल कार्यालय दस से भी अधिक पत्र आवास बोर्ड को लिख चुका है मगर आजतक आवास बोर्ड ने अंचल को अपनी रिपोर्ट नहीं सौंपी है. पिछले दिनों दिनांक 14/05/ 2025 को जमीन के मापी से संबंधित नोटिस चश्पा किया गया था जिसमें 2025 तक दावा और आपत्ति पेश करने को कहा गया था मगर इस अवधि में ना तो आकाशवाणी ना आवास बोर्ड ना ही कोई अन्य संबंधित विभाग ने दावा अथवा आपत्ति दर्ज कराया उसके बाद वह अपनी जमीन पर कब्जा करने पहुंचे लेकिन पुलिस ने आकर रोक दिया.
राजीव ने बताया कि आदित्यपुर में 1988 आकाशवाणी ने जमीन का अधिग्रहण किया था. अधिग्रहण की प्रक्रिया के तहत उनके पिता को मुआवजा नहीं दिया गया. उनके पिता की मौत के बाद जब उन्हें इसकी जानकारी हुई कि उनकी जमीन को गलत तरीके से कब्जा किया जा रहा है तब संबंधित विभागों के साथ पत्राचार शुरू किया. आयडा ने अनुमंडल पदाधिकारी के पत्रांक संख्या 1438- 19/12/ 2022 को लिखे पत्र में जमीन से संबंधित कोई भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया है. ना ही आकाशवाणी प्रबंधन द्वारा उन्हें जमीन से संबंधित दस्तावेज दिया जा रहा है. वर्तमान डीसी एलआर और डीसी से भी अनुरोध किया गया है मगर इंसाफ के बजाय उल्टा उनके खिलाफ ही कार्रवाई की जा रही है. उन्होंने बताया कि जिस जमीन पर आकाशवाणी का गेट खोला गया है वह भी नगर निगम से बगैर नक्शा पास कराये खोला गया है. राजीव ने बताया कि कुछ राजनीतिक लोग उनकी जमीन को हथियाने में लगे हैं जिसमें आकाशवाणी प्रबंधन को मोहरा बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि पूरे मामले को लेकर उन्होंने हाईकोर्ट में अर्जी लगाई है. जब तक हाई कोर्ट का फैसला नहीं आ जाता तब तक यथा स्थिति बनाए रखा जाए.

