ईचागढ़: थाना क्षेत्र के एनएच-33 स्थित नागासेरेंग में शुक्रवार को हुए सड़क हादसे में गौरांगकोचा निवासी नारायण गोराई की मौत हो गई. वह सड़क किनारे खड़े थे, तभी तेज रफ्तार टेलर वाहन का पहिया अचानक खुल गया और वाहन अनियंत्रित होकर उन्हें अपनी चपेट में ले लिया. मौके पर ही उनकी मौत हो गई. पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया.

जानकारी के अनुसार, नारायण गोराई को राज्यपाल के आगमन को लेकर ईचागढ़ पुलिस ने सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात किया था. चौकीदार की वर्दी में ड्यूटी के दौरान ही यह हादसा हुआ. लेकिन मृतक की नियुक्ति को लेकर सवाल उठ खड़े हुए हैं.
गांव के ग्रामीणों ने बताया कि नारायण गोराई सरकारी चौकीदार नहीं थे. वे मूल रूप से बांदु गांव के निवासी थे और गौरांगकोचा के वास्तविक चौकीदार कीर्तन तंतुबाई के घर में रहकर उनके बदले काम करते थे. इसी कारण पुलिस उन्हें समय- समय पर ड्यूटी में लगाती थी.
इस घटना पर भाजपा नेता भूषण मुर्मू ने कड़ा आक्रोश जताया. उन्होंने कहा कि नारायण गोराई आधिकारिक चौकीदार नहीं थे, फिर भी उन्हें बार- बार सुरक्षा व्यवस्था में लगाया जाता था. गणेश पूजा और पातकुम नवकुंज मेले में भी उन्हें ड्यूटी दी गई थी. उनकी सेवा को मान्यता मिलनी चाहिए. भूषण मुर्मू ने मांग की कि मृतक के परिवार को सरकारी प्रावधानों के तहत उचित मुआवजा दिया जाए. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने पहल नहीं की तो वे ग्रामीणों के साथ आंदोलन करेंगे.
नारायण गोराई की मौत से गांव में शोक और आक्रोश है. ग्रामीणों का कहना है कि जब पुलिस की ओर से उन्हें सुरक्षा ड्यूटी पर लगाया गया था, तो उनके परिजनों को भी वैसा ही मुआवजा मिलना चाहिए जैसा किसी सरकारी कर्मचारी की सेवा के दौरान मौत पर दिया जाता है.

