सरायकेला- खरसावां: जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में अनियमितताओं को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. उपायुक्त के निर्देश पर जिले में निलंबित जन वितरण प्रणाली दुकानों के खाद्यान्न स्टॉक, अभिलेखों और वितरण व्यवस्था का विशेष सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है. इसी जांच के दौरान खरसावां प्रखंड में दो निलंबित पीडीएस डीलरों के खिलाफ गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं, जिसके बाद दोनों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई है.

जांच प्रतिवेदन के अनुसार ग्राम सरजाडीह के निलंबित पीडीएस दुकानदार अशोक कुमार प्रधान के यहां अभिलेखों के अनुसार 13,935 किलोग्राम चावल और 3,454 किलोग्राम गेहूं स्टॉक में उपलब्ध होना चाहिए था, लेकिन निरीक्षण के दौरान स्टॉक पूरी तरह शून्य पाया गया.
इसी तरह ग्राम तेलीसाई के निलंबित पीडीएस दुकानदार विनोद नायक के मामले में भी गंभीर गड़बड़ी उजागर हुई. अभिलेखों के अनुसार उनके यहां 15,142 किलोग्राम चावल और 3,892 किलोग्राम गेहूं उपलब्ध होना चाहिए था, लेकिन भौतिक सत्यापन के दौरान चावल का स्टॉक शून्य पाया गया.
जिला आपूर्ति पदाधिकारी के निर्देश पर अंचल अधिकारी- सह- प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी, खरसावां द्वारा दोनों डीलरों के खिलाफ खरसावां थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है. प्रशासन का मानना है कि यह मामला सरकारी खाद्यान्न के संभावित गबन और वितरण व्यवस्था में गंभीर लापरवाही से जुड़ा हुआ है.
उपायुक्त ने जिले के अन्य निलंबित और संदिग्ध पीडीएस दुकानों की भी सघन जांच और भौतिक सत्यापन कराने का निर्देश दिया है. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच के दौरान जहां भी खाद्यान्न वितरण, स्टॉक संधारण या अभिलेखों में गड़बड़ी मिलेगी, वहां संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
जिला प्रशासन ने कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली गरीब और जरूरतमंद लोगों के खाद्य सुरक्षा अधिकारों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण जनकल्याणकारी व्यवस्था है. इसमें किसी भी प्रकार की अनियमितता, गबन या सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को पीडीएस व्यवस्था की नियमित निगरानी, सघन निरीक्षण और प्रभावी अनुश्रवण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है. प्रशासन ने साफ कहा है कि लाभुकों के अधिकारों से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा.



