सरायकेला: लगातार हो रही बारिश के बीच खरकाई नदी का जलस्तर बढ़ने से सरायकेला में बाढ़ का खतरा एक बार फिर गहराने लगा है. मंगलवार को खरकाई नदी का रौद्र रूप देखने के लिए सरायकेला में हजारों लोगों की भीड़ नदी किनारे उमड़ पड़ी. नदी का बढ़ता जलस्तर और तेज बहाव लोगों के लिए कौतूहल का विषय बना रहा, लेकिन इसी बीच नदी किनारे बढ़ती भीड़ ने प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है.


आदित्यपुर स्थित बाढ़ नियंत्रण कक्ष की ओर से जारी 18 अगस्त 2026 के दैनिक बाढ़ प्रतिवेदन के अनुसार शाम चार बजे आदित्यपुर खरकाई पुल पर नदी का जलस्तर 134.370 मीटर दर्ज किया गया. रिपोर्ट में खरकाई नदी के खतरे का स्तर 129.00 मीटर बताया गया है. इस लिहाज से नदी खतरे के निशान से करीब 5.37 मीटर ऊपर बह रही है. बाढ़ नियंत्रण कक्ष ने स्थिति को गंभीर मानते हुए नदी के जलस्तर और जल निकासी की लगातार निगरानी की जा रही है.
सुबह से ही नदी किनारे पहुंचने लगे लोग
खरकाई नदी का बढ़ा जलस्तर देखने के लिए मंगलवार सुबह से ही सरायकेला में लोगों की आवाजाही बढ़ने लगी. देखते ही देखते नदी किनारे हजारों लोगों की भीड़ जमा हो गई. युवा, बुजुर्ग और बच्चे तक नदी का बढ़ा हुआ जलस्तर देखने पहुंचे. कई लोग नदी के तेज बहाव और पानी के उफान को मोबाइल कैमरे में कैद करते नजर आए.
नदी का नजारा लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र जरूर बना हुआ है, लेकिन तेज बहाव के बीच नदी के किनारे जाना बेहद खतरनाक हो सकता है. पानी का बहाव अचानक बढ़ने की स्थिति में किसी भी तरह की अप्रिय घटना से इनकार नहीं किया जा सकता.
गंजिया बैराज के दो गेट खुले
बाढ़ नियंत्रण कक्ष की रिपोर्ट के अनुसार खरकाई नदी के जलस्तर के साथ विभिन्न जलाशयों और बैराजों की स्थिति पर भी लगातार नजर रखी जा रही है. गंजिया बैराज के दो गेट खुले होने की जानकारी दी गई है. अन्य जलाशयों के गेट और जल निकासी की स्थिति की भी निगरानी की जा रही है. लगातार बारिश जारी रहने की स्थिति में नदी के जलस्तर में और वृद्धि की आशंका बनी हुई है. ऐसे में नदी किनारे रहने वाले और निचले इलाकों के लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है.
नदी किनारे भीड़ बढ़ी, खतरा भी बढ़ा
प्रशासन और पुलिस लगातार लोगों से नदी के किनारे नहीं जाने की अपील कर रहे हैं. लोगों को नदी, तालाब और जलजमाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा किसी भी तरह का जोखिम नहीं लेने की सलाह दी जा रही है. हमारी अपील- नदी का बढ़ता जलस्तर तमाशा देखने का नहीं, खतरे को समझने का संकेत है. नदी किनारे उमड़ रही भीड़ के बीच अब सावधानी सबसे जरूरी है.
प्रमोद सिंह (संपादक)

