सरायकेला: नीमडीह थाना क्षेत्र के बूढ़ीबासा और महतोडीह गांव में उत्पाद विभाग ने अवैध शराब के खिलाफ बड़ी कार्रवाई का दावा किया है. विभाग के अनुसार छापेमारी में दो अवैध चुलाई भट्टियां ध्वस्त की गईं, 600 किलोग्राम जावा महुआ और 20 लीटर महुआ शराब बरामद की गई. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में अवैध शराब बनाने का सामान मिलने के बावजूद एक भी आरोपी गिरफ्तार क्यों नहीं हुआ ?


यह कोई पहला मामला नहीं है. जिले में जब भी उत्पाद विभाग की कार्रवाई की खबर आती है, लगभग हर बार भट्टियां तोड़ने, जावा महुआ नष्ट करने और शराब बरामद करने की बातें सामने आती हैं, लेकिन धंधा चलाने वाले लोग रहस्यमय तरीके से गायब मिलते हैं. आखिर ऐसा कब तक चलेगा ?
सवाल यह है कि यदि विभाग को अवैध शराब निर्माण के अड्डों की सटीक जानकारी मिल जाती है, तो वहां वर्षों से सक्रिय लोगों की पहचान और गिरफ्तारी क्यों नहीं हो पाती ? क्या विभाग की तैयारी इतनी कमजोर है कि छापेमारी की भनक पहले ही पहुंच जाती है, या फिर कार्रवाई केवल कागजी उपलब्धि बनकर रह गई है ?
ग्रामीणों का कहना है कि अवैध शराब का कारोबार किसी एक दिन में खड़ा नहीं होता. इसके पीछे पूरा नेटवर्क काम करता है. जावा महुआ इकट्ठा करना, भट्ठियां लगाना, शराब तैयार करना और उसकी बिक्री करना एक संगठित प्रक्रिया है. ऐसे में केवल सामग्री बरामद होना और संचालकों का हर बार बच निकलना कई सवाल खड़े करता है.
वास्तविकता यह है कि भट्ठियां आज टूटेंगी तो कल फिर बन जाएंगी. जावा महुआ फिर जमा हो जाएगा और शराब का कारोबार किसी दूसरे ठिकाने से शुरू हो जाएगा. लेकिन यदि इस धंधे के मास्टरमाइंड और संचालकों पर कानूनी शिकंजा नहीं कसता, तो ऐसे अभियान केवल दिखावटी सफलता तक सीमित रह जाएंगे.
उत्पाद विभाग को अब यह बताना चाहिए कि पिछले वर्षों में कितनी भट्टियां ध्वस्त की गईं, कितने लोगों की गिरफ्तारी हुई और कितनों को सजा दिलाई गई. केवल बरामदगी के आंकड़े गिनाने से अवैध शराब का कारोबार बंद नहीं होगा.
बूढ़ीबासा और महतोडीह की ताजा कार्रवाई के बाद जनता के मन में एक ही सवाल है- क्या उत्पाद विभाग अवैध शराब के कारोबार की जड़ों तक पहुंच रहा है, या फिर हर बार सिर्फ भट्टियां तोड़कर कार्रवाई का दावा कर रहा है ?
रिपोर्ट: विपिन वार्ष्णेय



