सरायकेला/ Pramod Singh खरसावां प्रखंड के बागरायडीह गांव में स्थित माता दुर्गा का प्राचीन मंदिर अपनी दैवीय शक्ति और भक्ति के लिए लोक आस्था का केंद्र माना जाता है. यहां 1940 से मां दुर्गा को वनदुर्गा के स्वरूप में पूजे जाने की परंपरा रही है. मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है. श्रद्धालु अपनी पीड़ा लेकर मां के दरबार में अर्जी लगाते हैं और मन्नत पूरी होने पर दोबारा खुशी-खुशी माता की आराधना के लिए लौटते हैं.

दुर्गा मंदिर पूजा समिति के कोषाध्यक्ष बबलू प्रधान ने बताया कि इस वर्ष की पूजा को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं. मंदिर परिसर में विजयादशमी के दूसरे दिन एकादशी को विशेष पूजा होती है, जिसमें हजारों भक्तों की भीड़ उमड़ती है. मां की आराधना के लिए यहां न सिर्फ सरायकेला- खरसावां जिले बल्कि ओड़िशा और बंगाल से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं.

इस वर्ष 03 अक्टूबर शुक्रवार को मुख्य पूजा सह मेला का आयोजन होगा. 02 अक्टूबर को जागरण सह मां अंबे की विधिवत पूजा अर्चना होगी तथा सुबह 4 बजे से स्थानीय जलाशय से दांडी पड़ाव कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. इसके पश्चात शिव- पार्वती विवाह, बेलवरन और अग्नि कुंवारी की पूजा होगी. शाम 4 बजे से आगुन माड़ा कार्यक्रम होगा, जहां भक्त अग्नि की वेदी पर चलकर भक्ति की शक्ति का प्रदर्शन करेंगे.
पूजा समिति के अनुसार प्रत्येक रविवार को माता की विशेष पूजा होती है और एकादशी के दिन भारी संख्या में श्रद्धालु माता की आराधना करने पहुंचते हैं. एकादशी के दिन विशेष पूजा के साथ कई धार्मिक और पारंपरिक अनुष्ठान आयोजित होते हैं. इस दिन मन्नत अनुसार भक्त दहकते अंगारों पर नंगे पैर चलकर मां से आशीर्वाद प्राप्त करते हैं, जबकि माता की कृपा से उन्हें कोई आंच नहीं आती.
पूजा कार्यक्रम 2025
खड़ा बसा- 25 सितंबर गुरुवार.
महाषष्ठी बेलवरन- 28 सितंबर रविवार.
महासप्तमी ठाकुरानी पूजा- 29 सितंबर सोमवार.
महाअष्टमी बड़ पूजा- 30 सितंबर मंगलवार.
महानवमी विश्राम- 01 अक्टूबर बुधवार.
विजयादशमी जागरण- 02 अक्टूबर गुरुवार.
एकादशी मुख्य पूजा सह अग्नि परीक्षा- 03 अक्टूबर शुक्रवार.
पूजा समिति (2025)
अध्यक्ष- नरेश प्रधान.
सचिव- विष्णु प्रधान.
कोषाध्यक्ष- बबलू प्रधान.
सदस्य- समस्त ग्रामीण.

