
सरायकेला: राजनगर प्रखंड के गमदेसाई बाड़ेडीह गांव में रजो पर्व के अवसर पर लोक संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम देखने को मिला. भव्य छऊ नृत्य एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम में देर रात तक पारंपरिक कला की गूंज सुनाई देती रही. बड़ी संख्या में ग्रामीण, युवा, महिलाएं और संस्कृति प्रेमी इस आयोजन के साक्षी बने.


कार्यक्रम का शुभारंभ झारखंड मुक्ति मोर्चा के वरिष्ठ नेता केपी सोरेन ने फीता काटकर किया. उद्घाटन के बाद उन्होंने रजो पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि झारखंड की पहचान उसकी समृद्ध लोक संस्कृति, परंपरा और सामाजिक सौहार्द में बसती है. छऊ जैसी लोक कलाएं हमारी अमूल्य धरोहर हैं, जिन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना और संरक्षित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है.

सांस्कृतिक संध्या के दौरान छऊ कलाकारों ने पौराणिक कथाओं और लोक परंपराओं पर आधारित शानदार प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. पारंपरिक वेशभूषा, मुखौटों, युद्ध कौशल और मनमोहक संगीत ने पूरे माहौल को रोमांच से भर दिया. वहीं एसटी ग्रुप की रंगारंग नृत्य प्रस्तुतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं. हर प्रस्तुति पर दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया.
अपने संबोधन में केपी सोरेन ने कहा कि गांवों में होने वाले ऐसे सांस्कृतिक आयोजन केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और अपनी सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखने का सशक्त मंच हैं. उन्होंने आयोजन समिति की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के आयोजन आपसी भाईचारे, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत को नई ऊर्जा प्रदान करते हैं.

उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि क्षेत्र के विकास, जनसमस्याओं के समाधान और जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए वे हमेशा उनके साथ खड़े रहेंगे और जनहित के मुद्दों को लगातार प्राथमिकता देंगे.
देर रात तक चले इस आयोजन में पूरा गांव उत्सव के रंग में रंगा नजर आया. परिवारों के साथ पहुंचे लोगों ने छऊ नृत्य, लोक कला और आधुनिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भरपूर आनंद लिया. रजो पर्व का यह आयोजन न केवल मनोरंजन का केंद्र बना, बल्कि झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ग्रामीण एकता का जीवंत उदाहरण भी बनकर सामने आया. कार्यक्रम में माझी बाबा रत्नाकर टुडू, शिशु राम टुडू, पूनम टुडू, बिरसिंह मुर्मू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे.
Edited By Sarita


