जामताड़ा में 178 केंद्रों पर 2500 समेत जिले के 770 परीक्षा केंद्रों में करीब 10,400 नवसाक्षर हुए शामिल


जामताड़ा: निरक्षरता के अंधेरे से लोगों को निकालकर उन्हें पढ़ने-लिखने और दैनिक जीवन में संख्यात्मक ज्ञान से सक्षम बनाने की दिशा में चलाए जा रहे नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत रविवार को जिलेभर में बुनियादी साक्षरता एवं संख्यात्मक जांच परीक्षा आयोजित की गई. परीक्षा के माध्यम से यह आकलन किया गया कि साक्षरता कार्यक्रम से जुड़े नवसाक्षरों ने पढ़ने, लिखने और सामान्य गणितीय ज्ञान में कितनी दक्षता हासिल की है. जिले के जामताड़ा, नारायणपुर, करमाटांड़, कुंडहित एवं फतेहपुर प्रखंड के विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया गया. सुबह 10 बजे से शाम पांच बजे तक परीक्षा आयोजित हुई. प्रत्येक परीक्षार्थी को परीक्षा पूरी करने के लिए तीन घंटे का समय दिया गया. परीक्षार्थियों को निर्धारित समयावधि के दौरान अपनी सुविधा के अनुसार परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी गई.
770 केंद्रों पर करीब 10,400 नवसाक्षरों का लक्ष्य
जामताड़ा प्रखंड में 178 परीक्षा केंद्रों पर 2500, नारायणपुर में 219 केंद्रों पर 3500, करमाटांड़ में 126 केंद्रों पर 2000, कुंडहित में 138 केंद्रों पर 1400 तथा फतेहपुर में 109 परीक्षा केंद्रों पर 1000 नवसाक्षरों के लिए परीक्षा आयोजित की गई। इस प्रकार जिले में कुल 770 केंद्रों पर करीब 10,400 नवसाक्षरों के मूल्यांकन की व्यवस्था की गई.
केवल पढ़ना-लिखना नहीं, आत्मनिर्भर बनाने की पहल
नव भारत साक्षरता कार्यक्रम का उद्देश्य केवल निरक्षर वयस्कों को अक्षर ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें रोजमर्रा के जीवन में पढ़ने-लिखने और संख्यात्मक ज्ञान का इस्तेमाल करने में सक्षम बनाना है. इस तरह की जांच परीक्षा से नवसाक्षरों की बुनियादी दक्षता का आकलन करने के साथ आगे की साक्षरता गतिविधियों की दिशा भी तय करने में मदद मिलेगी. परीक्षा में सर्वे के माध्यम से चिन्हित नवसाक्षरों के अलावा पूर्व के साक्षरता कार्यक्रम से जुड़े वैसे लोग भी शामिल हो सकते थे, जिन्हें प्रमाण पत्र नहीं मिला है. स्कूल ड्रॉपआउट वयस्कों, जिनके पास साक्षर होने का कोई प्रमाण पत्र नहीं है, को भी परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया गया. इससे साक्षरता अभियान का दायरा उन वयस्कों तक बढ़ाने का प्रयास किया गया, जो किसी कारण से औपचारिक शिक्षा से दूर रह गए.
शिक्षकों और शिक्षा कर्मियों की रही भूमिका
परीक्षा के सफल संचालन के लिए सभी संबंधित विद्यालयों को रविवार को खुला रखने का निर्देश दिया गया था. सहायक शिक्षक, सहायक आचार्य एवं अन्य शिक्षकों को परीक्षा संचालन में सहयोग करने की जिम्मेदारी दी गई. संबंधित विद्यालयों के प्रधानाध्यापक/प्रभारी प्रधानाध्यापक को केंद्राधीक्षक की जिम्मेदारी सौंपी गई थी. परीक्षा कार्य में प्रतिनियुक्त शिक्षकों को क्षतिपूर्ति अवकाश देने का भी प्रावधान किया गया. प्रश्नपत्रों की सुरक्षा को लेकर भी विशेष निर्देश दिए गए थे. बीआरसी स्तर से प्रश्नपत्र संबंधित सीआरपी/बीआरपी के माध्यम से परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाए गए. केंद्राधीक्षकों को प्रश्नपत्र सुरक्षित रखने और परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने का निर्देश दिया गया था.
साक्षरता अभियान को जमीनी स्तर तक पहुंचाने की कवायद
नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत ऐसे वयस्कों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है, जो उम्र बढ़ने के बावजूद पढ़ने-लिखने के अवसर से वंचित रह गए. जांच परीक्षा इस अभियान के तहत किए जा रहे प्रयासों की प्रगति को मापने का महत्वपूर्ण माध्यम है. इससे यह भी पता चलेगा कि चिन्हित नवसाक्षरों में बुनियादी पढ़ने-लिखने और संख्यात्मक क्षमता कितनी विकसित हुई है.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल

