सरायकेला: जिले के कांड्रा थाना क्षेत्र अंतर्गत सुदूरवर्ती हुदू पंचायत के ऊपरबेड़ा गांव स्थित तुमसा सरकारी स्कूल में एक ही परिवार के चार सदस्यों को बंधक बनाकर मारपीट किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. बंधकों में भृगु राम सरदार (22), जटल सारदार (45), हबलू सरदार (55) और करुणा सरदारिन (42) शामिल हैं.


सोमवार को पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन ग्रामीणों ने पुलिस और वहां पहुंचे इंडिया न्यूज़ वायरल बिहार झारखंड के पत्रकार विपिन वार्ष्णेय को भी घेर लिया. ग्रामीण कथित तौर पर अपना फैसला होने तक परिवार को नहीं छोड़ने पर अड़े हैं.
ग्रामीणों के चंगुल से किसी तरह से जान बचाकर भागे कार्तिक सरदार ने बताया कि हमारे वंशजों ने माझी परिवार को जमीन देकर गांव में बसाया है. अब माझी परिवार धीरे- धीरे उनकी जमीन पर जबरन कब्जा कर रहे है. विरोध करने पर मरने- मारने पर उतारू हो रहे हैं. इसकी जानकारी कई बार अंचल कार्यालय, स्थानीय पुलिस और जनप्रतिनिधियों को भी दी गई मगर किसी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई. नतीजतन अब उनके जान- माल और बहन- बेटियों के आबरू को नुकसान पहुंचाया जा रहा है. इसमें स्थानीय मुखिया सुगी मुर्मू, उनके पति फागु मुर्मू, ग्राम प्रधान, सदर मुर्मू, रंजीत मुर्मू, सहन मुर्मू, मजन मुर्मू, अजित सरदार, जगन्नाथ सरदार, शंकर मास्टर (पारा टीचर) की भूमिका को गंभीर बताया. उन्होंने बताया कि वह पूजा- पाठ का काम करते हैं रविवार को पूजा पाठ के सिलसिले में पश्चिम बंगाल गए थे लौटने पर पाया कि ग्रामीणों द्वारा उनके पूरे परिवार को बंधक बना लिया गया है. बहन के साथ भी छेड़खानी की गई है. किसी तरह पत्नी और बहन को लेकर आधी रात को जंगल के रास्ते गम्हरिया पहुंचे पुलिस को जानकारी दी मगर पुलिस ने मदद करने के बजाय उल्टा उनकी ही क्लास लगा दी. घर में तोड़फोड़ किया गया, दुर्गा मंदिर और बजरंग बली मंदिर में भी तोड़फोड़ की गई.
रविवार को मिली सूचना, लेकिन गांव नहीं पहुंची पुलिस
जिला परिषद लक्ष्मी सरदार का आरोप है कि रविवार को ही कांड्रा थाना पुलिस को मामले की जानकारी दे दी गई थी. लेकिन थाना प्रभारी ने क्षेत्र के पूर्व में नक्सल प्रभावित होने का हवाला देते हुए उस दिन मौके पर जाने से इनकार कर दिया. उनका दावा है कि वैकल्पिक रास्ते से गांव पहुंचने का आग्रह भी किया गया, लेकिन पुलिस ने गंभीरता नहीं दिखाई. सोमवार को मामला पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गीयारी तक पहुंचा. एसपी ने तत्काल कांड्रा थाना पुलिस को मौके पर पहुंचने का निर्देश दिया. इसके बाद थाना प्रभारी विनोद मुर्मू पुलिस बल के साथ ऊपरबेड़ा पहुंचे. पुलिस के साथ इंडिया न्यूज वायरल बिहार-झारखंड के रिपोर्टर विपिन वार्ष्णेय भी मौके पर पहुंचे. मगर वहां हालात अलग थे.
बंधकों को छुड़ाने गई पुलिस खुद ग्रामीणों से घिरी
पुलिस के गांव पहुंचते ही ग्रामीणों ने पुलिस टीम और पत्रकार को घेर लिया. ग्रामीण कथित तौर पर अपना फैसला होने तक बंधक बनाए गए परिवार को नहीं छोड़ने की बात पर अड़े हुए हैं. उल्लेखनीय है कि ऊपरबेड़ा सुदूरवर्ती इलाका है. पूर्व में यह क्षेत्र नक्सल प्रभावित रहा है और मोबाइल कनेक्टिविटी भी बेहद कमजोर बताई जा रही है. इसी वजह से घटनास्थल से पूरी और स्पष्ट जानकारी मिलने में परेशानी हो रही है.
पुलिस अधीक्षक मनोज स्वर्गीयारी ने बताया कि अतिरिक्त पुलिस बल मौके पर भेजा जा रहा है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि ग्रामीणों की समस्याओं को समझकर समाधान कराने का प्रयास किया जाएगा.
सवाल फिर वही. सूचना मिलने के बाद तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं ?
इस घटना ने कांड्रा पुलिस की कार्यशैली को एक बार फिर सवालों के घेरे में ला दिया है. जिला परिषद सदस्य लक्ष्मी सरदार का कहना है कि यदि स्थानीय पुलिस रविवार को सूचना मिलते ही तत्परता दिखाती तो हालात इस स्तर तक नहीं पहुंचते. सबसे गंभीर बात यह है कि बताया जा रहा है कि रविवार को जिस समय कांड्रा थाना में दो युवकों की मौत के मामले को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस चल रही थी, उसी दौरान पीड़ित कार्तिक सरदार भी थाना पहुंचा था. आरोप है कि उसकी शिकायत को उस समय अपेक्षित गंभीरता से नहीं लिया गया.
12 दिनों में दूसरा गंभीर मामला, पुलिस की तत्परता पर सवाल
कांड्रा थाना क्षेत्र में पिछले करीब 12 दिनों से राहुल हांसदा और तपन प्रधान का मामला भी चर्चा में है. दोनों युवकों के लापता होने के बाद उनके शव रपचा की वन भूमि में दफन मिले थे. उस मामले में भी परिजनों ने आरोप लगाया था कि शुरुआती दिनों में उनकी शिकायत पर पुलिस ने अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई. रविवार को पुलिस ने उस मामले में दो आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा. और उसी दिन कथित तौर पर एक दूसरा परिवार अपने सदस्यों को बचाने की गुहार लेकर थाने पहुंचा. अब ऊपरबेड़ा में पुलिस और पत्रकार के घिरने तथा एक परिवार के सदस्यों के कथित तौर पर बंधक बने होने की सूचना ने सवाल और गंभीर कर दिए हैं.
• आखिर सूचना मिलने के बावजूद पुलिस रविवार को मौके पर क्यों नहीं पहुंची ?
• क्या नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने का पुराना इतिहास किसी गंभीर सूचना पर तत्काल कार्रवाई नहीं करने का आधार हो सकता है ?
• परिवार को बंधक बनाने और कथित मारपीट के पीछे जमीन विवाद की पूरी कहानी क्या है ?
और सबसे महत्वपूर्ण सवाल
• क्या अतिरिक्त पुलिस बल पहुंचने के बाद महिला, पुरुष और बच्चों समेत बंधक परिवार को सुरक्षित बाहर निकाला जा सकेगा ?
फिलहाल एसपी के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस बल ऊपरबेड़ा भेजा जा रहा है. अब नजर इस बात पर है कि पुलिस हालात को बिना किसी अप्रिय घटना के नियंत्रित कर बंधक परिवार को सुरक्षित निकाल पाती है या नहीं और पूरे मामले में कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है.

