रांची: झारखंड में MMDR कानून को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. झामुमो के विरोध और आंदोलन के ऐलान के बीच पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला है. भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि केंद्र का MMDR कानून राज्य और राष्ट्रहित में है, लेकिन झामुमो इसे गलत तरीके से पेश कर जनता को भ्रमित कर रही है.


रघुवर दास ने आरोप लगाया कि धनबाद, बोकारो, चतरा, हजारीबाग और रामगढ़ जैसे जिलों में बड़े पैमाने पर कोयले की लूट हो रही है. जल, जंगल और जमीन की बात करने वाली सरकार ने सत्ता में आने के बाद इन्हें कथित सिंडिकेट के हवाले कर दिया और झारखंड को “लूटखंड” बना दिया.
उन्होंने खनन रॉयल्टी को लेकर दावा किया कि इसका लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार को मिलता है. साथ ही सवाल उठाया कि राज्य में स्वीकृत 34 कोल ब्लॉकों में से केवल चार ही क्यों शुरू हो सके. लौह अयस्क और बॉक्साइट के कई ब्लॉकों का समुचित संचालन नहीं होने को लेकर भी उन्होंने सरकार को घेरा.
रघुवर दास ने DMF फंड में अनियमितता का आरोप लगाते हुए धनबाद, चाईबासा और चतरा का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में आज भी लोगों को शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है.
निवेश के मुद्दे पर उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को घेरते हुए कहा कि देश-विदेश से निवेश लाने के दावे किए गए, लेकिन धरातल पर अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं दे रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार, अवैध खनन और बढ़ते सेस के कारण राज्य में उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल प्रभावित हुआ है.
पूर्व मुख्यमंत्री ने हेमंत सरकार से सवाल किया कि पिछले छह वर्षों में कितने आदिवासी और मूलवासी परिवारों की आर्थिक स्थिति में वास्तविक बदलाव आया है. उन्होंने कहा कि MMDR के नाम पर आंदोलन करने के बजाय राज्य सरकार को खनन, भ्रष्टाचार और विकास से जुड़े सवालों का जवाब देना चाहिए.

