Jharkhand Health Negligence जमशेदपुर: हेमंत बाबू देखिए… आपके राज्य में क्या हो रहा है ! रिम्स रेफर मरीज को समय पर नहीं मिली एंबुलेंस, परिजन घंटों भटकते रहे
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जमशेदपुर: झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है. ताजा मामला जमशेदपुर के महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) अस्पताल का है, जहां गंभीर रूप से घायल एक मरीज को रांची स्थित रिम्स रेफर किए जाने के बावजूद समय पर सरकारी एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने का आरोप सामने आया है.
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जानकारी के अनुसार, रविवार शाम करीब 7 बजे सरायकेला निवासी विजय बानरा अपनी मोटरसाइकिल से जा रहे थे. इसी दौरान सरायकेला कोर्ट के समीप उनकी बाइक अनियंत्रित होकर फिसल गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए. स्थानीय लोगों और परिजनों की मदद से उन्हें तत्काल इलाज के लिए एमजीएम अस्पताल, जमशेदपुर लाया गया. अस्पताल में चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद रातभर उनकी निगरानी में इलाज किया.
सोमवार सुबह मरीज की हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें रांची के रिम्स रेफर कर दिया. आरोप है कि रेफर होने के बाद परिजनों ने कई बार सरकारी 108 एंबुलेंस सेवा से संपर्क किया, लेकिन लंबे इंतजार के बावजूद एंबुलेंस उपलब्ध नहीं कराई गई. मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए परिजन अस्पताल परिसर में इधर-उधर भटकते रहे.
परिजनों का कहना है कि जब सरकारी एंबुलेंस नहीं मिली तो मजबूरी में उन्हें निजी एंबुलेंस की व्यवस्था करनी पड़ी. निजी एंबुलेंस संचालक ने रांची तक मरीज को ले जाने के लिए 4,500 रुपये की मांग की, जिसके बाद परिजन उसी व्यवस्था से मरीज को ले जाने की तैयारी में जुट गए.
समाचार लिखे जाने तक यह स्पष्ट नहीं हो सका था कि एमजीएम अस्पताल प्रशासन की ओर से बाद में सरकारी एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई या नहीं. इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और 108 एंबुलेंस व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. गंभीर मरीजों को समय पर एंबुलेंस नहीं मिलने से उनकी जान जोखिम में पड़ सकती है.
हालांकि, इस मामले में स्वास्थ्य विभाग या एमजीएम अस्पताल प्रशासन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी इस मामले की जांच कर क्या कार्रवाई करते हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं.