जामताड़ा: जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था की बदहाली की एक दर्दनाक तस्वीर सामने आई है. जहां गोपालपुर पंचायत के शहरबेड़ा गांव निवासी मोनू टुडू की तबीयत शुक्रवार शाम अचानक बिगड़ गई. परिजनों का आरोप है कि गंभीर हालत में उन्होंने 108 एंबुलेंस सेवा से संपर्क किया, लेकिन काफी प्रयास के बावजूद एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी.


स्थिति गंभीर होने पर परिजनों और ग्रामीणों ने मरीज को ट्रैक्टर-ट्रॉली पर खटिया रखकर जामताड़ा सदर अस्पताल पहुंचाया. हालांकि तब तक काफी देर हो चुकी थी. अस्पताल में इलाज शुरू किया गया, लेकिन उपचार के दौरान मोनू टुडू की मौत हो गई.
घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश देखा गया. उनका कहना है कि यदि समय पर एंबुलेंस उपलब्ध हो जाती तो संभवतः मरीज की जान बचाई जा सकती थी. परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच और जवाबदेही तय करने की मांग की है.
इस मामले पर जामताड़ा के सिविल सर्जन डॉ. शिव प्रसाद मिश्रा ने स्वीकार किया कि जिले में एंबुलेंस की कमी एक बड़ी समस्या बनी हुई है. उन्होंने बताया कि कुछ महीने पहले तक जिले में 13 एंबुलेंस संचालित थीं, लेकिन वर्तमान में उनमें से 8 एंबुलेंस खराब पड़ी हैं. इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों और संबंधित एजेंसी को कई बार अवगत कराया जा चुका है.
घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी योजनाओं और दावों के बावजूद कई गांवों में समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं पहुंच पा रही हैं.
मोनू टुडू की मौत के बाद क्षेत्र में शोक और नाराजगी का माहौल है. ग्रामीणों ने मांग की है कि जिले की एंबुलेंस व्यवस्था को जल्द दुरुस्त किया जाए ताकि भविष्य में किसी मरीज को समय पर इलाज के अभाव में अपनी जान न गंवानी पड़े.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल

