जामताड़ा: दिल्ली के जंतर- मंतर पर छात्र आंदोलन के दौरान हुए कथित लाठीचार्ज और NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक के विरोध में गुरुवार को जामताड़ा में छात्रों और युवाओं ने ‘न्याय मार्च’ निकाला. जामताड़ा युवा मंच के बैनर तले आयोजित इस मार्च में बड़ी संख्या में छात्र-युवा शामिल हुए.



गांधी मैदान से शुरू हुआ मार्च सुभाष चौक, मुख्य बाजार और शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए इंदिरा चौक पहुंचा, जहां केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला दहन किया गया. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की.
मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने “छात्रों को न्याय दो”, “पेपर लीक बंद करो”, “शिक्षा बचाओ-देश बचाओ” और “लोकतंत्र की हत्या बंद करो” जैसे नारे लगाए. मुख्य बाजार से गुजरते समय बड़ी संख्या में राहगीर और दुकानदार भी प्रदर्शन देखने के लिए रुके.

मीडिया से बातचीत में जसीम अंसारी ने कहा कि यह न्याय मार्च जंतर-मंतर पर अपने अधिकारों और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे छात्रों के समर्थन में निकाला गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया, उन्हें घसीटा गया और आंसू गैस के गोले छोड़े गए. उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग की.
रिजवान शेख ने आरोप लगाया कि NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है. उन्होंने कहा कि जामताड़ा का यह मार्च देशभर के छात्रों के साथ एकजुटता का प्रतीक है. यदि छात्रों को न्याय नहीं मिला तो आंदोलन को सत्याग्रह का रूप दिया जाएगा.
हाफिज नाजीर हुसैन ने कहा कि छात्रों की आवाज को बल प्रयोग से दबाने का प्रयास लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है. उन्होंने सरकार से छात्रों के साथ संवाद कर उनकी समस्याओं का समाधान निकालने की अपील की.
वहीं अकबर अंसारी ने कहा कि युवाओं के भविष्य की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए.
प्रदर्शन के अंत में जामताड़ा युवा मंच ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, कथित पेपर लीक मामलों की निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने तथा छात्र आंदोलनों पर बल प्रयोग की बजाय संवाद का रास्ता अपनाने की मांग की. प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा.
मार्च में अरबाज खान, आशीदुल इजहारुल अंसारी, शमशेर आलम, जाबेद अंसारी, पुष्पा मरांडी, राजा अंसारी, जाहिद अंसारी, सिराज अंसारी, सुफियान कुरैशी, माजेश हेमब्रम, मेराज अंसारी, सुरेश सोरेन, मानिक मिर्धा, सादिक अंसारी, राहुल दास, विक्रांत दास, पुष्पा मुर्मू, सुहागिनी टुडू, सीमा सोरेन, सुबोदी हेमब्रम और निरोधी हेमब्रम सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल





