जामताड़ा/ Manish Barnwal 26 फरवरी.. ज्यादा दिन नहीं गुजरा है…जब नाला थाना क्षेत्र के पलास्थली स्थित बन्द पड़े कोयला खदान में भीषण हादसा हुआ था. इस दुर्घटना में खदान में अवैध रूप से खुदाई कर रहे करीब आठ लोग अचानक चाल धंसने से मलबे में दब गए थे. स्थानीय ग्रामीण, पुलिस और सीआईएसएफ की टीम के द्वारा बचाव अभियान चलाकर किसी तरह मजदूरों को मलबे से जीवित बाहर निकाल गया था. तत्काल प्रशासन ने अवैध माइनिंग के विरुद्ध ठोस कदम उठाने की बात कही गई थी ताकि दुबारा कोई हादसा न हो. लेकिन स्थानीय कोयला माफिया और बंगाल के कोयला माफिया के गठजोड़ से दुबारा नाला थाना क्षेत्र के पलास्थली में ही कोयले का अवैध खनन शूरु हो गया है. साथ ही रोजाना नाला से देर रात ग्यारह बजे के बाद अवैध कोयले से भरा दस ट्रक दुमका होते हुए बिहार में प्रवेश कर रहा है.

बताते चलें कि पलस्थली स्थित धंस चुके कोयला खदान के बगल में ही कोयला माफिया के द्वारा 10 से 15 जगह कुआंनुमा खदान मजदूरों के सहायता से खुदवाया गया है और यह काम मजदूर बिना किसी सुरक्षा के रस्सी के सहारे खदान में उतरकर करते हैं. साथ ही कोयला कटिंग भी किया जाता है. कोयला कटिंग के उपरांत ट्रैक्टर से कोयले को एक जगह डम्प कर दिया जाता है. जहां जेसीबी की मदद से ट्रक में लोड किया जाता है. लोडेड ट्रक को कुंडहित में कांटा (वजन) किया जाता है.

बताते चलें कि पश्चिम बंगाल निवासी जगदीश तिवारी और स्थानीय कोयला माफिया कुंठा यादव के मिली भगत से नाला में कोयले का अवैध खनन विगत 15 दिन से संचालित किया जा रहा है. माइनिंग, वन विभाग पुलिस प्रशासन सहित जिले के अन्य पदाधिकारी के बिना सहयोग क्या इतने बड़े पैमाने पर कोयले का अवैध कारोबार चल सकता है. वर्तमान में प्रतिदिन 10 ट्रक बिहार की ओर भेजा जा रहा है. दुमका के रास्ते बिहार भेजे जाने के क्रम में जामताड़ा जिला से कोयला ट्रक को स्थानीय माफिया के द्वारा चार चक्का वाहन और दो से ज्यादा बाइक के साथ एस्कॉर्ट कर दुमका जिला में प्रवेश करा दिया जाता है. दुमका पहुंचते ही दुमका के अमर मंडल के गुर्गे अवैध कोयले से लदे ट्रक को एस्कॉर्ट कर बिहार की सीमा तक पहुंचा देते हैं. वहां से बिहार निवासी कोयला खरीदार का दायित्व हो जाता है सुरक्षित गंतव्य की पहुंचा देने का.
अवैध कोयला लदे प्रत्येक ट्रक के लिए बिहार के व्यापारी के द्वारा नाला में कार्यरत कोयला माफिया को एक लाख तीस हजार का भुगतान किया जाता है. इस हिसाब से प्रतिदिन कोयला माफिया को 13 लाख रुपए का भुगतान किया जाता है. महीने का तीन करोड़ 90 लाख रुपए कोयला माफिया के वारे न्यारे होते हैं. वहीं कोयला काटने और खदान में कोयला निकालने में लगे मजदूरों के भुगतान के लिए 34 सौ रुपए पर टन दिया जाता है. क्या संभव है नाला थाना क्षेत्र का पलस्थली जो पूर्व से अवैध कोयला खनन के लिए बदनाम है और अभी कुछ दिन पूर्व ही भीषण हादसा हो चुका है वहां इतने बड़े स्तर पर पुनः अवैध कोयले का व्यापार शुरू हो जाए और स्थानीय प्रशासन को इसकी भनक न हो.

क्या कहते हैं जिला खनन पदाधिकारी
जिला खनन पदाधिकारी मिहिर सालकर ने कहा कि प्राप्त सूचना के आधार पर विभाग के द्वारा कारवाई की जाती है. उपायुक्त के निर्देश पर कोयले के अवैध परिवहन के विरुद्ध अभियान समय समय चलाया जाता रहा है. बीते दिनों अवैध कोयला परिवहन पर तीन प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी.

क्या कहते हैं जामताड़ा उपायुक्त
जामताड़ा उपायुक्त रवि आनंद ने कहा कि माइनिंग और संबंधित विभाग को निर्देश दे दिया गया है कि जल्द से जल्द कार्रवाई कर अवैध कोयले के व्यवसाई पर प्रतिबंध लगाने का कार्य किया जाएगा.

