जामताड़ा: गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की 165वीं जयंती के अवसर पर झारखंड बागाली समिति, जिला शाखा जामताड़ा की ओर से शनिवार को शहर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई. कार्यक्रम के माध्यम से गुरुदेव की साहित्यिक, सांस्कृतिक और मानवीय विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश दिया गया.

शोभायात्रा की शुरुआत सेंट एंथोनी स्कूल स्थित विद्यासागर लाइब्रेरी से हुई. यात्रा कुंवर सिंह चौक और सुभाष चौक होते हुए सरखेलडीह स्थित गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की प्रतिमा स्थल तक पहुंची. इस दौरान समिति के सदस्य, बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में शहरवासी शामिल हुए. पूरा वातावरण रवीन्द्र संगीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और देशभक्ति गीतों से गुंजायमान रहा.
प्रतिमा स्थल पहुंचने के बाद उपस्थित लोगों ने गुरुदेव की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की. कार्यक्रम के दौरान रवीन्द्र संगीत और नृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियां भी दी गईं, जिसने लोगों को भावविभोर कर दिया.
मौके पर झारखंड बंगाली समिति की ओर से वार्षिक कैलेंडर का भी विधिवत विमोचन किया गया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर केवल महान कवि ही नहीं, बल्कि विश्व मानवता, शिक्षा, संस्कृति और राष्ट्र चेतना के प्रतीक थे. उनके विचार आज भी समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रहे हैं.
कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष डॉ डी डी भंडारी, उपाध्यक्ष डॉ कंचन गोपाल मंडल, महासचिव चंचल कुमार राय, कोषाध्यक्ष चंदना मंडल, देवोजीत सरखेल, प्रदीप सरकार, चंडी दास पुरी, डॉ पंकज कुमार सरखेल, मीना सरखेल सहित कई पदाधिकारी, सदस्य और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे.
इस दौरान झारखंड बंग्ला भाषी उन्नयन समिति के संरक्षक सह झारखंड बंगाली समिति जिला शाखा के अध्यक्ष डॉ डी डी भंडारी ने झारखंड में बांग्ला एकेडमी गठन की मांग उठाई. उन्होंने कहा कि राज्य के 24 जिलों में से लगभग 16 जिले बांग्ला भाषी बहुल हैं, जहां बांग्ला भाषा जनसंपर्क की प्रमुख भाषा के रूप में प्रयुक्त होती है. उन्होंने कहा कि झारखंड राज्य गठन के 25 वर्ष बीत जाने के बाद भी बांग्ला भाषा, संस्कृति और साहित्य के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए कोई ठोस सरकारी पहल नहीं की गई है.
Report By Manish Baranwal



