चाईबासा: सारंडा जंगल में सुरक्षा बलों का अभियान लगातार तेज होने के बीच एक करोड़ रुपये के इनामी भाकपा माओवादी नेता मिसिर बेसरा उर्फ सागर पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है. सूत्रों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियों की घेराबंदी और लगातार चल रहे ऑपरेशन के कारण मिसिर बेसरा लगातार अपना ठिकाना बदलने को मजबूर है और लंबे समय से सामान्य जीवन नहीं जी पा रहा है.

जानकारी के मुताबिक सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव के बीच उसके दस्ते में भी टूट शुरू हो गई है. बताया जा रहा है कि 20 से अधिक नक्सली उसका साथ छोड़ चुके हैं. लगातार अभियान और सुरक्षा बलों के दबाव के कारण कई नक्सली जंगल के अलग- अलग हिस्सों में छिपने को मजबूर हैं. सूत्रों का दावा है कि इनमें से कुछ नक्सली आने वाले समय में आत्मसमर्पण कर सकते हैं.
कभी भाकपा माओवादी का मजबूत गढ़ माने जाने वाले सारंडा जंगल में अब नक्सलियों की स्थिति लगातार कमजोर होती दिखाई दे रही है. एक समय था जब संगठन के शीर्ष कमांडरों के निर्देश पर नक्सली बड़ी घटनाओं को अंजाम देते थे, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं. रेड कॉरिडोर के कमजोर पड़ने के बाद नक्सली अब सीमित इलाकों तक सिमटते जा रहे हैं.
सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र में लगातार सर्च ऑपरेशन तेज कर रखा है, जिससे संगठन पर दबाव और बढ़ गया है. सूत्रों के अनुसार मिसिर बेसरा की तबीयत भी ठीक नहीं बताई जा रही है. लगातार जंगल में ठिकाना बदलने, दवा और भोजन की कमी के कारण वह शारीरिक रूप से कमजोर हो चुका है. अपने साथियों के साथ छोड़ने के बाद उस पर मानसिक दबाव भी बढ़ने की बात कही जा रही है.
इसी बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत मिसिर बेसरा भविष्य में सरेंडर का रास्ता चुन सकता है. हालांकि अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. उधर सुरक्षा बलों को उम्मीद है कि लगातार अभियान और बढ़ते दबाव के कारण मिसिर बेसरा और उसके बचे हुए साथी आत्मसमर्पण का रास्ता चुन सकते हैं, जिससे सारंडा क्षेत्र में लंबे समय से जारी नक्सल चुनौती को समाप्त करने में मदद मिलेगी.



