जामताड़ा: सरना-सनातन संस्कृति, आदिवासी परंपराओं और धार्मिक स्थलों को लेकर झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री सह जामताड़ा विधायक इरफान अंसारी के बयानों पर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. भाजपा जिलाध्यक्ष सुमित शरण सहित पार्टी के अन्य नेताओं ने मंत्री पर आदिवासी समाज की भावनाओं से जुड़े मुद्दों पर राजनीति करने का आरोप लगाते हुए उनके बयानों और कार्यों पर सवाल उठाए.


भाजपा नेताओं ने कहा कि आदिवासी समाज की संस्कृति, धार्मिक आस्था, भाषा और परंपराएं झारखंड की पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं. इनके संरक्षण के नाम पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय ठोस पहल होनी चाहिए.
भाजपा जिलाध्यक्ष सुमित शरण ने कहा कि सरना और सनातन परंपराओं को समझने के लिए भारतीय संस्कृति की व्यापकता और विविधता को समझना आवश्यक है. भारतीय संस्कृति विभिन्न आस्थाओं, परंपराओं और उपासना पद्धतियों का सम्मान करती है. उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में प्रकृति से लेकर प्रत्येक जीव में ईश्वर के दर्शन की अवधारणा रही है. ऐसी सांस्कृतिक विरासत को संकीर्ण राजनीतिक नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए.
सुमित शरण ने मंत्री पर भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि आदिवासी समाज के हितों पर सवाल उठाने से पहले कांग्रेस शासनकाल में आदिवासियों के लिए किए गए कार्यों का भी हिसाब दिया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय और समाज सुधार की बात करने वालों को सभी समुदायों में व्याप्त सामाजिक कुरीतियों, जातिगत भेदभाव और पसमांदा समाज की स्थिति पर भी समान दृष्टिकोण से विचार करना चाहिए.
उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने झारखंड राज्य के गठन, आदिवासी नेतृत्व को आगे बढ़ाने, संथाली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने और भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
जाहेर थान को लेकर विधायक निधि पर उठाए सवाल
भाजपा जिला उपाध्यक्ष दिलीप कुमार हेम्ब्रम ने नारायणपुर प्रखंड के पहाड़पुर गांव में 20 तारीख को आयोजित कार्यक्रम के संदर्भ में मंत्री इरफान अंसारी के बयान पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि मंत्री ने भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्रियों बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा तथा चंपाई सोरेन पर आदिवासी संस्कृति को मिटाने का आरोप लगाया था. दिलीप हेम्ब्रम ने कहा कि इस तरह के आरोप लगाने से पहले मंत्री को अपने कार्यों और बयानों पर भी विचार करना चाहिए.
उन्होंने जाहेर थान जैसे पवित्र आदिवासी धार्मिक स्थल को लेकर विधायक निधि के उपयोग पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इसे कब्रिस्तान में बदलने की दिशा में राशि का उपयोग किए जाने का मामला गंभीर है. उन्होंने कहा कि इस संबंध में संबंधित अभिलेखों और तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए. भाजपा नेताओं ने कहा कि आदिवासी धार्मिक स्थलों और सरना परंपराओं की रक्षा के लिए किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी.
संथाली भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने का किया उल्लेख
भाजपा जिला मंत्री अबिता हांसदा ने कहा कि आदिवासी समाज की भाषा, पहचान और सांस्कृतिक अधिकारों को सम्मान दिलाने में भाजपा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. उन्होंने संथाली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने को ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे भाषा के संरक्षण, विकास और प्रतिष्ठा को मजबूती मिली है. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की भाषा और परंपराओं के संरक्षण के प्रयासों को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर देखा जाना चाहिए.
आदिवासी महिलाओं के सम्मान का मुद्दा भी उठाया
भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के प्रखंड अध्यक्ष उत्तम हेमराम ने स्वास्थ्य मंत्री पर आरोप लगाया कि 20 रुपये की साड़ी का प्रलोभन देकर आदिवासी महिलाओं से पूरे दिन झंडा उठवाकर बाजार में घुमाना उनके सम्मान के अनुकूल नहीं है. उन्होंने कहा कि आदिवासी महिलाओं का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए और उनके नाम पर राजनीतिक लाभ लेने की प्रवृत्ति से समाज को सतर्क रहना चाहिए.
उत्तम हेमराम ने पहाड़पुर गांव में आयोजित यात्रा को आदिवासी परंपरा बताए जाने पर भी आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि किसी कार्यक्रम को आदिवासी परंपरा बताने से पहले उस समाज की वास्तविक सांस्कृतिक मान्यताओं और परंपराओं को समझना जरूरी है. उन्होंने चंपाई सोरेन, बाबूलाल मरांडी और अर्जुन मुंडा का उल्लेख करते हुए कहा कि इन नेताओं ने आदिवासी संस्कृति और पहचान के संरक्षण से जुड़े मुद्दों को उठाया है.
अंत में भाजपा नेताओं ने स्वास्थ्य मंत्री से अपने बयानों और आरोपों पर तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की आस्था, भाषा, धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण सभी जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है. इन संवेदनशील विषयों पर राजनीतिक विवाद बढ़ाने के बजाय समाज के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए मिलकर काम किया जाना चाहिए.
रिपोर्ट: मनीष बरनवाल

