जमशेदपुर: एमजीएम अस्पताल में शनिवार को स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाली घटना सामने आई. जुगसलाई निवासी नेहा परवीन प्रसव पीड़ा के बाद एमजीएम अस्पताल पहुंचीं, लेकिन मुख्य गेट के पास ही ऑटो में उन्होंने बच्चे को जन्म दे दिया. परिजनों का आरोप है कि प्रसव के बाद करीब आधे घंटे तक महिला और नवजात को चिकित्सा सहायता के लिए इंतजार करना पड़ा.


परिजनों के अनुसार नेहा को पहले सदर अस्पताल ले जाया गया था. वहां खून की कमी और ऑपरेशन की संभावित जरूरत बताते हुए एमजीएम रेफर किया गया. इसके बाद परिजन उन्हें जुगसलाई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए, वहां से भी बेहतर इलाज के लिए एमजीएम भेज दिया गया. आरोप है कि एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने के कारण परिजनों को गर्भवती महिला को ऑटो से लेकर जाना पड़ा.
रास्ते में खराब सड़क और मानगो पुल पर जाम के कारण अस्पताल पहुंचने में देरी हुई. इसी बीच प्रसव पीड़ा बढ़ती गई और एमजीएम अस्पताल के मुख्य गेट पर पहुंचते ही नेहा ने टेंपो में बच्चे को जन्म दे दिया.
परिजनों का आरोप है कि इसकी सूचना अस्पताल कर्मियों और नर्सों को देने के बावजूद तत्काल मदद नहीं मिली. करीब आधे घंटे बाद एक नर्स मौके पर पहुंचीं, जिसके बाद जच्चा-बच्चा को महिला एवं प्रसूति विभाग में भर्ती कराया गया. चिकित्सकीय जांच में मां और नवजात दोनों स्वस्थ बताए गए हैं.
गौरतलब है कि एमजीएम अस्पताल के बाहर वाहन में प्रसव का यह पहला मामला नहीं बताया जा रहा है. इससे पहले भी एक महिला के सूमो वाहन में बच्चे को जन्म देने की घटना सामने आई थी. ऐसे में ताजा घटना ने प्रसूति मरीजों के लिए रेफरल, एंबुलेंस और अस्पताल की आपातकालीन सहायता व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं.

