जमशेदपुर: कोल्हान के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमजीएम में शनिवार को बड़ा हादसा टल गया. अस्पताल की एक लिफ्ट छठी और पांचवीं मंजिल के बीच अचानक फंस गई. उस वक्त लिफ्ट में मरीज, बच्चे और उनके परिजन सवार थे. लिफ्ट के बीच में अटकते ही अंदर फंसे लोगों में अफरा-तफरी मच गई और वे मदद के लिए आवाज लगाने लगे.


बताया जा रहा है कि लिफ्ट में करीब 20 से 25 मरीज एवं उनके परिजन फंसे थे. घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया. अस्पताल कर्मी सौरभ ठाकुर ने अन्य लोगों की मदद से फंसे यात्रियों को बाहर निकालने की कोशिश शुरू की. करीब 45 मिनट तक चले रेस्क्यू के बाद मरीजों, बच्चों और परिजनों को सुरक्षित बाहर निकाला गया. सभी के बाहर निकलने के बाद लोगों ने राहत की सांस ली.
घटना के बाद अस्पताल की लिफ्ट की तकनीकी स्थिति और रखरखाव को लेकर सवाल उठने लगे हैं. मौके पर मौजूद लोगों का आरोप है कि इससे पहले भी लिफ्ट फंसने की घटनाएं हो चुकी हैं. इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया. हालांकि लिफ्ट में खराबी के वास्तविक कारण को लेकर अस्पताल प्रबंधन की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है.
BJP ने सरकार को घेरा, JMM ने किया पलटवार
घटना को लेकर भाजपा नेता बबुआ सिंह ने राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग पर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति खराब है और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही बरती जा रही है. उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और स्वास्थ्य विभाग से ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की.
वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा नेता सरोज महापात्रा ने भाजपा के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि एमजीएम की घटना तकनीकी खराबी का परिणाम हो सकती है और तकनीकी खराबी कहीं भी हो सकती है. उन्होंने भाजपा पर हर मामले को लेकर राज्य सरकार को बदनाम करने की कोशिश करने का आरोप लगाया. महापात्र ने केंद्र सरकार के अधीन व्यवस्थाओं में हुई घटनाओं का उल्लेख करते हुए भाजपा की आलोचना की.
फिलहाल घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है. मगर मरीजों से भरी लिफ्ट का दो मंजिलों के बीच फंस जाना अस्पताल में लिफ्टों की नियमित तकनीकी जांच और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल जरूर छोड़ गया है.

