गम्हरिया: सरायकेला- खरसावां जिले के गम्हरिया स्थित वात्सल्य बालिका गृह से दो नाबालिग बच्चियों के फरार होने के मामले में अब पुलिस- प्रशासन के दावों के बीच जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी संतोष कुमार ठाकुर की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं. हालांकि इस मामले में शिकायतकर्ता खुद संतोष कुमार ठाकुर ही हैं, लेकिन पूरे घटनाक्रम को लेकर विभागीय जवाबदेही पर लगातार चर्चा तेज हो रही है.

उपायुक्त नितीश कुमार सिंह ने प्राथमिक जांच में बालिका गृह संचालकों की लापरवाही मानी है, लेकिन विभागीय स्तर पर निगरानी और सुरक्षा मानकों को लेकर अब तक कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है. सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर बालिका गृह की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी और क्या उद्घाटन से पहले या बाद में सुरक्षा व्यवस्था की कोई गंभीर जांच की गई थी.
गौरतलब है कि करीब एक महीने पहले ही उपायुक्त द्वारा इस वात्सल्य बालिका गृह का उद्घाटन किया गया था. ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या बालिका गृह को संचालन की अनुमति देने से पहले सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था का भौतिक सत्यापन किया गया था या नहीं.
इधर जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी संतोष कुमार ठाकुर का नाम पहले भी विवादों में आ चुका है. कोरोना काल में अनाथ और जरूरतमंद बच्चों के लिए चलाई गई स्पॉन्सरशिप योजना में उनपर गंभीर आरोप लगे थे. आरोप था कि गरीब बच्चों को मिलने वाली सरकारी सहायता राशि में कमीशन की मांग की जा रही थी. उस समय भी जिले में विभागीय कार्यशैली को लेकर कई सवाल उठे थे.
शिकायतों के बाद उनका तबादला कोडरमा कर दिया गया था, हालांकि बाद में दोबारा सरायकेला-खरसावां में उनकी वापसी को लेकर भी विभागीय गलियारों में चर्चाएं होती रही थीं. विभाग की एक महिला कर्मी द्वारा भी संतोष कुमार ठाकुर पर छेड़खानी का आरोप लगाते हुए राज्य बाल संरक्षण समिति में शिकायत दर्ज कराई गई है. हालांकि इस आरोप को विभागीय स्तर पर दबा दिया गया है. मामला फिलहाल राज्य स्तर पर विचाराधीन बताया जा रहा है.
अब दो नाबालिग बच्चियों के फरार होने की घटना के बाद लोगों के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि आखिर गरीब, असहाय और अनाथ बच्चों की सुरक्षा और कल्याण के लिए बनाई गई योजनाओं में यदि अधिकारी स्तर पर ही लापरवाही या भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहें, तो जरूरतमंद परिवार न्याय और सुरक्षा की उम्मीद किससे करें. फिलहाल पूरे मामले को लेकर जिले में चर्चाओं का दौर जारी है और लोग निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. स्थानीय लोगों में यह चर्चा अब जोर पकड़ने लगी है कि कमीशन के चक्कर में आनन- फानन में उक्त केंद्र का संचालन बगैर सुरक्षा जांच के शुरू कर दिया गया. लोग अब इस पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं. वैसे उपयुक्त नीतीश कुमार सिंह ने साफ कहा है कि इस पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और जो भी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि अबतक जांच में जो तथ्य सामने आए हैं उससे साफ हो गया है कि संस्थान में सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया था. हालांकि 72 घंटे बाद भी जिला प्रशासन या पुलिस प्रशासन यह तय नहीं कर पाई है कि इस पूरे मामले में वास्तविक दोषी कौन है. सभी को इंतजार दोनों बच्चियों के बरामदगी का है.



