सरायकेला: गम्हरिया थाना परिसर में एक महिला द्वारा पुलिसकर्मी पर लगाए गए दुष्कर्म के आरोप को लेकर झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस मामले को अत्यंत शर्मनाक और चिंताजनक बताते हुए राज्य में महिलाओं की सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं.


गौरतलब है कि गम्हरिया थाना मामले में महिला की लिखित शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज की गई है. आरोपी वायरलेस ऑपरेटर नीरज लकड़ा को गिरफ्तार किया जा चुका है और मामले की जांच के लिए एसडीपीओ अनुभव भारद्वाज के नेतृत्व में SIT गठित की गई है. थाना स्तर पर लापरवाही को लेकर थानेदार सहित पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई हुई है.
‘जेल में महिलाएं सुरक्षित नहीं, थाने में महिलाएं सुरक्षित नहीं’
बाबूलाल मरांडी ने अपने पोस्ट में सवाल किया कि जब महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालने वाले लोगों पर ही इस तरह के गंभीर आरोप लगें तो महिलाएं सुरक्षा की उम्मीद किससे करें. उन्होंने लिखा, “जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो महिलाओं की सुरक्षा की उम्मीद आखिर किससे की जाए ?”
मरांडी ने बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा से जुड़े एक पूर्व मामले का भी उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि वहां अल्पसंख्यक समुदाय की एक महिला बंदी के यौन शोषण और गर्भवती होने का मामला सामने आया था. इसी संदर्भ में उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जेल और थाने जैसे संस्थानों में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं तो वे आखिर जाएं कहां. यह दावा मरांडी की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा है.
DGP पर भी साधा निशाना
नेता प्रतिपक्ष ने अपनी पोस्ट में राज्य की डीजीपी तदाशा मिश्रा की नियुक्ति पर भी सवाल उठाते हुए महिला सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी का मुद्दा उठाया. उन्होंने पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता का उल्लेख करते हुए पुलिस व्यवस्था में सुधार के बजाय कथित अवैध वसूली और अन्य गतिविधियों में उलझे रहने का आरोप भी लगाया.
SP से कठोर कार्रवाई की मांग
बाबूलाल मरांडी ने सरायकेला- खरसावां के पुलिस अधीक्षक से मामले में आरोपी पुलिसकर्मी के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है.
इधर, मामले में पुलिस की कार्रवाई शुरू हो चुकी है. महिला की शिकायत पर FIR दर्ज करने के साथ आरोपी पुलिसकर्मी को गिरफ्तार किया गया है और जांच आगे बढ़ाई जा रही है. उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस ने घटनास्थल और अन्य साक्ष्यों को भी जांच के दायरे में लिया है.

