चांडिल: नर्सिंग शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में MBNS इंस्टिट्यूट ऑफ़ नर्सिंग को इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) से औपचारिक मान्यता प्राप्त हुई है. यह मान्यता बीते शुक्रवार को मिलने के बाद से ही महाविद्यालय परिसर में हर्ष, उत्साह और गर्व का वातावरण बना हुआ है.

इंडियन नर्सिंग काउंसिल की मान्यता किसी भी नर्सिंग संस्थान के लिए गुणवत्ता, विश्वसनीयता और राष्ट्रीय शैक्षणिक मानकों की आधिकारिक पुष्टि मानी जाती है. इस मान्यता के साथ MBNS इंस्टिट्यूट ऑफ़ नर्सिंग ने यह प्रमाणित कर दिया है कि संस्थान द्वारा प्रदान की जा रही शिक्षा, प्रशिक्षण, फैकल्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर और क्लीनिकल सुविधाएं राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हैं. INC की मान्यता मिलने से संस्थान में अध्ययनरत छात्र- छात्राओं को देशभर में नर्सिंग रजिस्ट्रेशन, उच्च शिक्षा तथा सरकारी और निजी क्षेत्रों में रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे. इसका लाभ झारखंड के साथ- साथ बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल सहित अन्य राज्यों के विद्यार्थियों को भी मिलेगा. विशेषज्ञों के अनुसार, INC मान्यता प्राप्त संस्थानों से उत्तीर्ण नर्सिंग विद्यार्थियों को अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में प्राथमिकता दी जाती है.
MBNS इंस्टिट्यूट ऑफ़ नर्सिंग की यह उपलब्धि पूरे कोल्हान क्षेत्र और आसपास के इलाकों के लिए गर्व का विषय है. इससे क्षेत्रीय नर्सिंग शिक्षा को नई पहचान मिलेगी और राज्य को प्रशिक्षित, कुशल और संवेदनशील नर्सिंग प्रोफेशनल्स उपलब्ध होंगे, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं और सशक्त होंगी.
इस अवसर पर MBNS इंस्टिट्यूट ऑफ़ नर्सिंग के अध्यक्ष विवेक कुमार सिंह ने कहा कि इंडियन नर्सिंग काउंसिल की मान्यता मिलना संस्थान के लिए गर्व की बात है और यह गुणवत्ता व उच्च शैक्षणिक मानकों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण है. वहीं संस्थान के डायरेक्टर अनुप सिंह ने कहा कि INC की मान्यता विद्यार्थियों के भविष्य के लिए मजबूत आधार है और इससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और अवसर मिलेंगे. संस्थान प्रबंधन ने इस उपलब्धि पर सभी शिक्षकों, कर्मचारियों, विद्यार्थियों और शुभचिंतकों के प्रति आभार व्यक्त किया है. साथ ही यह संकल्प दोहराया है कि भविष्य में भी गुणवत्ता आधारित शिक्षा, आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाओं और नैतिक मूल्यों के साथ नर्सिंग शिक्षा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रयास जारी रहेगा.

