रांची: ईचागढ़ विधायक सबिता महतो ने विधानसभा के तारांकित प्रश्न के माध्यम से सोमवार को चांडिल डैम से प्रभावित 84 मौजा और 116 गांव के विस्थापितों के पुनर्वास, मुआवजा और सिंचाई व्यवस्था का मुद्दा प्रमुखता से उठाया. विधायक ने सरकार से विस्थापित परिवारों की समस्याओं के शीघ्र समाधान और चांडिल डैम के पानी से प्रभावित क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की.



सरकार की ओर से दिए गए जवाब के अनुसार चांडिल डैम से कुल 116 गांव प्रभावित हुए हैं. इनमें 38 गांव पूर्ण रूप से और 78 गांव आंशिक रूप से प्रभावित हैं. डैम से कुल 19,177 विस्थापित परिवार प्रभावित हुए हैं. इनमें से 15,221 परिवारों की विकास पुस्तिका तैयार की जा चुकी है.
सरकार ने बताया कि आवास निर्माण अनुदान के लिए 13,965 परिवार पात्र पाए गए हैं. इनमें 12,852 परिवारों को अनुदान का भुगतान किया जा चुका है, जबकि 1,113 परिवारों का भुगतान अभी लंबित है.
वहीं पुनर्वास स्थलों की स्थिति को लेकर सरकार ने बताया कि कुल 22 पुनर्वास स्थलों में से केवल 13 का आंशिक विकास हुआ है, जबकि नौ पुनर्वास स्थल अब भी अविकसित हैं.
लिफ्ट सिंचाई से 50 गांवों को मिल सकता है लाभ
लिफ्ट सिंचाई को लेकर सरकार ने बताया कि मैसाड़ा सुवर्णरेखा डैम से करीब 15 किलोमीटर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की योजना से लगभग 50 गांवों को लाभ मिल सकता है. इसके अलावा नीमडीह और कुकड़ू प्रखंड की 14 पंचायतों की करीब 9,336 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की योजना भी सरकार के विचाराधीन है.
विधायक सबिता महतो ने सरकार के जवाब को संतोषप्रद नहीं बताया. उन्होंने कहा कि चांडिल डैम से प्रभावित लोगों की समस्याएं लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन सिंचाई के क्षेत्र में अब तक विभाग की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है.
उन्होंने सरकार से मांग की कि 116 प्रभावित गांवों के लंबित पुनर्वास, मुआवजा और अन्य कार्यों को शिविर लगाकर शीघ्र पूरा कराया जाए. साथ ही चांडिल डैम के पानी का उपयोग प्रभावित क्षेत्र की सिंचाई के लिए सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस और समयबद्ध पहल की जाए.





