
चाईबासा: पश्चिम सिंहभूम जिले के सोनुआ प्रखंड अंतर्गत बोयकेड़ा पंचायत में ग्रामीणों ने आत्मनिर्भरता और सामुदायिक एकजुटता की अनूठी मिसाल पेश की है. वर्षों से संजय नदी पर स्थायी पुल और पंचायत भवन से गांव तक पक्की सड़क की मांग पूरी नहीं होने पर ग्रामीणों ने श्रमदान के माध्यम से नदी पर लकड़ी का अस्थायी पुल तैयार कर लिया.


बोयकेड़ा पंचायत मुख्यालय होने के बावजूद यहां के ग्रामीण आज भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं. बरसात के दिनों में संजय नदी उफान पर रहती है, जिससे लोगों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है. वहीं पंचायत भवन से गांव को जोड़ने वाली मुख्य सड़क कच्ची और जर्जर होने के कारण बारिश में कीचड़ से भर जाती है. इसका सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों पर पड़ता है.

प्रशासनिक उपेक्षा से नाराज ग्रामीणों ने हाल ही में विशेष ग्रामसभा आयोजित की. बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जब तक सरकार स्थायी पुल का निर्माण नहीं कराती, तब तक ग्रामीण स्वयं श्रमदान कर आवागमन की व्यवस्था करेंगे. इसके बाद गांव के सैकड़ों महिला, पुरुष, युवा और बुजुर्ग एकजुट होकर संजय नदी पर लकड़ी का अस्थायी पुल बनाने में जुट गए और सामूहिक प्रयास से पुल का निर्माण पूरा किया.

इस जनहित कार्य के दौरान कोबरा कमांडो सालुका जामुदा ने श्रमदान कर रहे ग्रामीणों के लिए भोजन एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी निभाई. ग्रामीणों का कहना है कि यह पुल केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि गांव की एकता, सहयोग और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है.
पुल निर्माण कार्य में बुरजू टोली के समाजसेवी चक्रधर तियु, एमोतो होनहागा, कृष्ण गागराई, रुवादिरी मुण्डा, बागुन जामुदा और सालुका बाड़िंग, बेहराबिन्धा गांव के बीएसएफ जवान कृष्णा बाड़िंग, शिक्षक तुराम बाड़िंग एवं समाजसेवी सिंगराय जोंको, सोसोगुटू टोली के समाजसेवी मंगल सिंह तियु एवं सुवेंल कुंकल, जन्डोय टोली के समाजसेवी सालुका तियु एवं जोटो सुरीन तथा चुम्बरु साई टोली के समाजसेवी बुधराम बानरा सहित गांव के दर्जनों ग्रामीणों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया.

ग्रामीणों ने झारखंड सरकार, जिला प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों से संजय नदी पर शीघ्र स्थायी पुल निर्माण तथा पंचायत भवन से गांव तक मुख्य सड़क के पक्कीकरण की मांग की है. उनका कहना है कि बेहतर सड़क और पुल बनने से शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य आवश्यक सेवाओं तक लोगों की पहुंच आसान होगी तथा भविष्य में ग्रामीणों को इस तरह की कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा.
रिपोर्ट: जयंत प्रमाणिक





