
आदित्यपुर: नगर निगम क्षेत्र के मतदाताओं के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया खतरे की घंटी साबित हो सकती है. अब तक सामने आए आंकड़ों के अनुसार नगर निगम क्षेत्र के करीब 45 से 50 हजार मतदाताओं का नाम मतदाता सूची से हट सकता है. यदि ऐसा हुआ तो आगामी चुनाव में बड़ी संख्या में मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने से वंचित हो सकते हैं.


वर्तमान मतदाता सूची में आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र के 1 लाख 43 हजार 559 मतदाता दर्ज हैं. लेकिन चल रही SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं द्वारा आवश्यक दस्तावेज जमा नहीं करने, बीएलओ को सहयोग नहीं देने तथा जागरूकता की कमी के कारण हजारों नाम कटने की आशंका जताई जा रही है.
जानकारों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी क्षेत्रों में SIR को लेकर अधिक भ्रम की स्थिति है. कई लोग प्रक्रिया को जटिल मानकर सत्यापन से दूरी बना रहे हैं. जबकि निर्वाचन आयोग के अनुसार यह प्रक्रिया बेहद सरल है और केवल निर्धारित दस्तावेजों के साथ सत्यापन कराना आवश्यक है.
जिला प्रशासन और निर्वाचन आयोग लगातार जागरूकता अभियान चला रहे हैं. बीएलओ घर-घर पहुंचकर सत्यापन कार्य कर रहे हैं. इसके बावजूद कई घरों में लोग नहीं मिल रहे हैं या आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा रहे हैं. यही स्थिति बनी रही तो अंतिम मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हट सकते हैं.
SIR का निर्धारित कार्यक्रम
29 जुलाई 2026 तक . मैपिंग एवं इम्युनरेशन (Enumeration) की प्रक्रिया.
5 अगस्त 2026 . ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन.
8 अगस्त 2026 से . दावा एवं आपत्ति दर्ज करने की प्रक्रिया.
7 अक्टूबर 2026 . अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन.
क्या करें मतदाता
अपने क्षेत्र के बीएलओ से तत्काल संपर्क करें.
आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराएं.
मतदाता सूची में अपना नाम और विवरण का सत्यापन अवश्य कर लें.
यदि घर पर बीएलओ आएं तो उन्हें पूरा सहयोग दें.
ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद अपना नाम अवश्य जांचें और त्रुटि होने पर निर्धारित समय में दावा-आपत्ति दर्ज कराएं.
विशेषज्ञों का सुझाव
लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत मताधिकार है. ऐसे में केवल जागरूकता के अभाव में मतदाता सूची से नाम कटना चिंता का विषय है. सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, आवास समितियों और राजनीतिक दलों को भी लोगों को SIR प्रक्रिया के प्रति जागरूक करना चाहिए. नगर निगम क्षेत्र में वार्ड स्तर पर विशेष जागरूकता शिविर, माइकिंग, पोस्टर और सोशल मीडिया के माध्यम से अभियान चलाया जाए, ताकि कोई भी पात्र मतदाता अपने मतदान के अधिकार से वंचित न रहे.





