आदित्यपुर: नगर निगम क्षेत्र के वार्ड संख्या 19 स्थित रोड नंबर 18 में चल रहे पीसीसी सड़क निर्माण कार्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. करीब 20 लाख 35 हजार 448 रुपये की लागत से बनाई जा रही सड़क के निर्माण के दौरान कथित तौर पर ऐसी लापरवाही बरती गई कि सड़क के नीचे बिछाई गई जल-नल योजना की पाइपलाइन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. इससे न केवल पेयजल आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है, बल्कि सरकारी राजस्व को भी भारी नुकसान पहुंचा है.

स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क निर्माण के लिए की गई खुदाई के दौरान संवेदक द्वारा आवश्यक सावधानी नहीं बरती गई. परिणामस्वरूप जल-नल योजना के तहत बिछाई गई पाइपलाइन कई स्थानों पर टूट गई. यह पाइपलाइन करोड़ों रुपये की लागत से संचालित महत्वाकांक्षी पेयजल योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य घर-घर स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है.
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले स्थल का तकनीकी निरीक्षण और भूमिगत संरचनाओं का सही आकलन किया गया होता तो इस तरह की स्थिति उत्पन्न नहीं होती. लोगों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी ने बिना पर्याप्त सर्वेक्षण के ही खुदाई शुरू कर दी, जिसका खामियाजा अब आम लोगों और सरकारी योजनाओं को भुगतना पड़ रहा है.

मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या सड़क निर्माण से पूर्व हाउसिंग बोर्ड के आवासों और सड़क की वास्तविक चौड़ाई की मापी की गई थी. यदि मापी और तकनीकी जांच की गई थी तो फिर भूमिगत पाइपलाइन को नुकसान कैसे पहुंचा. वहीं यदि ऐसा नहीं किया गया तो यह निर्माण प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही का मामला माना जा सकता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी सड़क निर्माण परियोजना में भूमिगत पाइपलाइन, बिजली केबल और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं का नक्शा देखकर कार्य किया जाना अनिवार्य होता है. इसके बावजूद यदि सरकारी योजना की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हुई है तो इसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए.
स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, हुए नुकसान का आकलन करने तथा जिम्मेदार अधिकारियों और संवेदक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. लोगों का कहना है कि एक ओर सरकार विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर लापरवाही के कारण सरकारी योजनाओं को नुकसान पहुंच रहा है, जिसका बोझ अंततः जनता पर ही पड़ता है.
अब लोगों की निगाहें नगर निगम और संबंधित विभागों की कार्रवाई पर टिकी हैं. यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकारी संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं.



