आदित्यपुर: नगर निगम के वार्ड संख्या-17 में आवास बोर्ड की दो खाली जमीनों की घेराबंदी की कवायद स्थानीय लोगों के लिए नई मुसीबत बन गई है. घेराबंदी के कारण क्षेत्र की जल निकासी बाधित होने का आरोप है. इससे करीब दो हजार की आबादी प्रभावित बताई जा रही है. कई आवासीय सोसाइटियों में नाली और किचन का पानी निकलना बंद होने से लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है.


प्रभावित क्षेत्रों में हरिओम नगर 5/B, रॉयल रेसीडेंसी अपार्टमेंट, आस्था डुप्लेक्स, कमलेश्वरी अपार्टमेंट, शिव मंदिर के पीछे के हाउसिंग आवास, 7LF एमपी टॉवर, एमपी नगीना, हेवेन रिवर व्यू, 7HF हाउसिंग सोसाइटी और हेवेन टावर सहित आसपास के इलाके शामिल बताए गए हैं.
समस्या को लेकर वार्ड पार्षद नीतू शर्मा के नेतृत्व में सोमवार को स्थानीय लोग आवास बोर्ड की कनिष्ठ अभियंता उत्पला सरदार से मिले. स्थानीय लोगों के मुताबिक कनिष्ठ अभियंता ने नगर निगम की ओर से अनापत्ति प्रमाण पत्र यानी NOC के लिए पहल करने की बात कही, जिसके बाद नाली निर्माण की अनुमति दी जा सकेगी.

इसके बाद पार्षद और स्थानीय लोगों ने महापौर संजय सरदार से मुलाकात कर पूरी स्थिति से अवगत कराया. महापौर ने आवास बोर्ड से NOC प्राप्त कर सड़क एवं नाली निर्माण की दिशा में जल्द पहल करने का आश्वासन दिया.
*आवास बोर्ड से ही खरीदे मकान, फिर सड़क-नाली के लिए संघर्ष क्यों ?*
स्थानीय लोगों ने पूरे मामले में आवास बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि प्रभावित क्षेत्र के बड़ी संख्या में निवासी आवास बोर्ड के ही खरीददार हैं और उनके डीड में सड़क, नाली, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का उल्लेख है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आवास बोर्ड की जमीन की घेराबंदी के कारण यदि वर्षों पुरानी जल निकासी बाधित हो रही है तो वैकल्पिक व्यवस्था पहले क्यों नहीं सुनिश्चित की गई ?
क्षेत्र में यह आशंका भी जताई जा रही है कि खाली जमीन की घेराबंदी के पीछे भविष्य में किसी बिल्डर अथवा अन्य पक्ष को जमीन हस्तांतरित करने की योजना हो सकती है. हालांकि इस आशंका की फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. ऐसे में आवास बोर्ड से जमीन की वास्तविक स्थिति और घेराबंदी के उद्देश्य को स्पष्ट करने की मांग भी उठ रही है.
स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल निकासी की समस्या का जल्द स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो वे जिला उपायुक्त से मिलकर शिकायत करेंगे. अब सवाल आवास बोर्ड और नगर निगम दोनों के सामने है कि करीब दो हजार लोगों की जल निकासी पहले सुनिश्चित होगी या घेराबंदी का काम आगे बढ़ेगा ?

