चाईबासा: पश्चिमी सिंहभूम जिले के सोनुआ प्रखंड स्थित पनसुआ डैम में मछली पालन को बढ़ावा देने और स्थानीय मत्स्यजीवी परिवारों की आजीविका को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से शनिवार को जिला मत्स्य विभाग की ओर से करीब 1.50 लाख मछलियों के जीरा (बच्चे) छोड़े गए. इस पहल से आने वाले समय में डैम में मछली उत्पादन बढ़ने के साथ स्थानीय लोगों के लिए स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होने की उम्मीद है.


डैम में छोड़े गए कुल 1.50 लाख मत्स्य जीरा में 1.30 लाख भारतीय मेजर कार्प प्रजाति की मछलियां शामिल हैं, जिनमें रोहू, कतला एवं मृगल के जीरा प्रमुख हैं. इसके अलावा 20 हजार ग्रास कार्प के जीरा भी डैम में छोड़े गए.
इस अवसर पर जिला मत्स्य पदाधिकारी नवीन कुमार एवं सोनुआ के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) सोमनाथ उरांव ने संयुक्त रूप से डैम के पानी में मत्स्य जीरा छोड़ा.
मौके पर जिला मत्स्य पदाधिकारी नवीन कुमार ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य डैम में मछलियों के उत्पादन एवं आकार में वृद्धि करना है. जब मछलियां बड़े आकार की हो जाएंगी, तब स्थानीय मत्स्यजीवी समिति के सदस्य एवं मत्स्य पालक उनका पकड़कर बिक्री कर सकेंगे. इससे उन्हें स्वरोजगार से जुड़ने और अपने परिवार का भरण-पोषण करने में आर्थिक सहायता मिलेगी.
उन्होंने कहा कि मत्स्य पालन ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका का एक बेहतर माध्यम है. विभाग की इस पहल से स्थानीय मत्स्यजीवी परिवारों को भविष्य में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी.
कार्यक्रम में जलाशय मत्स्यजीवी सहयोग समिति के अध्यक्ष एवं सचिव, समिति के सदस्य, केज मित्र तथा बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे.
रिपोर्ट : जयंत प्रमाणिक

