आदित्यपुर: नगर निगम के वार्ड संख्या-9 स्थित मीरूडीह में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार कचरा ट्रीटमेंट प्लांट के विरोध के बाद अब निगम प्रशासन सख्त रुख अपनाता नजर आ रहा है. शनिवार को प्रस्तावित वार्ड सभा से पहले नगर आयुक्त एजाज अनवर ने स्पष्ट किया है कि स्थानीय ग्रामीणों को अपनी आपत्ति रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा, लेकिन विरोध संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से होना चाहिए. किसी भी तरह का बाहरी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा.


नगर आयुक्त ने कहा, “जमीन सरकारी है और योजना भी सरकारी है. एक वार्ड के लिए नगर निगम के 35 वार्डों की जनता को परेशान नहीं होने दिया जाएगा.” उन्होंने संकेत दिया कि वार्ड सभा में सकारात्मक निष्कर्ष नहीं निकलने और सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न होने की स्थिति में निगम प्रशासन नियमानुसार कड़े कदम उठा सकता है.
नगर आयुक्त के मुताबिक प्लांट निर्माण में निर्धारित मानकों का अनुपालन किया गया है. इसके बावजूद स्थानीय ग्रामीणों को यदि कोई आपत्ति है तो उनकी बात सुनी जाएगी. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वार्ड सभा मीरूडीह के स्थानीय ग्रामीणों के साथ होनी चाहिए और इसे सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी स्थानीय पार्षद की होगी.
जनप्रतिनिधियों की भूमिका मिली तो कार्रवाई से पीछे नहीं हटेंगे
मामले में नगर आयुक्त का एक और बयान महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि विरोध अथवा हस्तक्षेप में यदि निगम के किसी चुने हुए जनप्रतिनिधि की संलिप्तता सामने आती है तो प्रशासन कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा. हालांकि किसी जनप्रतिनिधि की संलिप्तता को लेकर अभी कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है.
बुधवार के हंगामे के बाद बदला पूरा घटनाक्रम
आदित्यपुर नगर निगम के लिए ठोस कचरा प्रबंधन लंबे समय से बड़ी चुनौती बना हुआ है. लंबे इंतजार और करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद मीरूडीह में प्लांट तैयार हुआ. बुधवार से यहां कचरा डंपिंग और प्रोसेसिंग शुरू करने की तैयारी थी.
डिप्टी मेयर के साथ चार-पांच पार्षद, नगर आयुक्त, सिटी मैनेजर और निगम के अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे थे. इसी दौरान कुछ ग्रामीणों ने विरोध शुरू कर दिया और स्थिति तनावपूर्ण होने पर पुलिस को भी मोर्चा संभालना पड़ा. आरोप है कि विरोध में स्थानीय ग्रामीण शामिल नहीं थे. पर्दे के पीछे से बहरी शक्ति काम कर रहा था.
हंगामे के बाद पहुंचे मेयर, फिर वार्ड सभा और फाइल जांच की बात
पूरे घटनाक्रम में मेयर संजय सरदार की भूमिका भी चर्चा में आ गई. इतने महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की शुरुआत के समय उनके मौके पर मौजूद नहीं रहने और हंगामा शुरू होने के बाद पहुंचने पर सवाल उठे. मौके पर पहुंचने के बाद मेयर ने ग्रामीणों की आपत्तियों को सुनने, दोबारा वार्ड सभा कराने और परियोजना से संबंधित फाइल की जांच की बात कही. इसके बाद मामला तत्काल प्लांट शुरू करने के बजाय वार्ड सभा और दस्तावेजों की जांच पर आकर टिक गया.
अब सवाल यह भी है कि यदि परियोजना सभी निर्धारित प्रक्रियाओं और मानकों को पूरा करने के बाद तैयार हुई है तो फाइल की दोबारा जांच की आवश्यकता क्यों पड़ी ? वहीं यदि प्रक्रियाओं को लेकर कोई कमी या संदेह है तो करोड़ों रुपये खर्च होने से पहले उसका परीक्षण क्यों नहीं हुआ ? इन सवालों का जवाब परियोजना से संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों से ही स्पष्ट हो सकेगा.
35 वार्डों का प्रोजेक्ट, शुरुआत में पहुंचे केवल चार-पांच पार्षद
इस पूरे घटनाक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू निगम के अधिकांश निर्वाचित प्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी भी है. 35 वार्डों वाले नगर निगम की इस महत्वपूर्ण परियोजना के मौके पर डिप्टी मेयर के साथ महज चार-पांच पार्षदों की मौजूदगी यह सवाल खड़ा करती है कि बाकी पार्षद कहां थे ?
कचरा प्रबंधन किसी एक वार्ड की समस्या नहीं, बल्कि पूरे नगर निगम क्षेत्र से जुड़ा विषय है. ऐसे में इतनी महत्वपूर्ण परियोजना पर निगम के निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच एकजुटता और स्पष्ट संवाद का अभाव दिखाई देना अपने आप में चिंता का विषय है.
अब शनिवार की वार्ड सभा निर्णायक हो सकती है. एक तरफ स्थानीय ग्रामीणों की आपत्तियां हैं, दूसरी तरफ 35 वार्डों के कचरा प्रबंधन का सवाल और करोड़ों रुपये की तैयार परियोजना. यदि सहमति नहीं बनती है तो निगम प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है और मेयर, डिप्टी मेयर तथा पार्षद इस मुद्दे पर एकमत होते हैं या नहीं, इस पर शहर की निगाहें रहेंगी.
संतोष कुमार
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