लोहरदगा: विजयादशमी के पावन अवसर पर लोहरदगा सदर प्रखंड के मन्हो गांव में भव्य पारंपरिक जतरा का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में लोहरदगा के सांसद सह छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रभारी सुखदेव भगत शामिल हुए. जतरा स्थल पर पहुंचने पर आयोजन समिति और ग्रामीणों ने पारंपरिक ढोल-नगाड़ों तथा मांदर की थाप के बीच उनका स्वागत किया.


सभा को संबोधित करते हुए सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि जतरा आदिवासी समाज की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक विरासत है, जो पूर्वजों से मिली है. हमारे पूर्वज दूरदर्शी सोच रखते थे. पुराने समय में आवागमन के साधनों और सड़कों का अभाव था. ऐसे दौर में जतरा सामाजिक एकजुटता, समाज की उन्नति और विकास पर चर्चा करने का प्रमुख माध्यम हुआ करता था. पूर्वज जतरा के बहाने एक स्थान पर एकत्रित होकर सामाजिक कुरीतियों को दूर करने और समाज को बेहतर बनाने पर विचार-विमर्श करते थे.
उन्होंने कहा कि जतरा केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक संबंधों और आपसी भाईचारे का भी प्रतीक है. पहले ऐसे आयोजनों में शादी-विवाह के रिश्ते तय होते थे और विभिन्न गांवों के लोग एक-दूसरे से मिलते-जुलते थे. जतरा में सभी वर्गों और समुदायों की भागीदारी सामाजिक समरसता को मजबूत करती है. इस तरह के आयोजन समाज को एक सूत्र में बांधने का काम करते हैं.
आधुनिकता की दौड़ में अपनी जड़ों को न भूलें युवा
सांसद सुखदेव भगत ने युवाओं से अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि अखड़ा, नगाड़ा, मांदर और जतरा आदिवासी समाज की पहचान हैं. आधुनिकता की दौड़ में अपनी जड़ों से दूर होना उचित नहीं है. युवाओं को पारंपरिक रीति-रिवाजों, लोक संस्कृति और सांस्कृतिक धरोहर को बचाकर रखना चाहिए. साथ ही अगली पीढ़ी को भी इन परंपराओं से जोड़ना जरूरी है, ताकि हमारी संस्कृति आने वाले समय में भी जीवंत बनी रहे.
खोड़हा दलों के साथ सांसद ने किया सामूहिक नृत्य
सभा को संबोधित करने के बाद सांसद सुखदेव भगत स्वयं विभिन्न खोड़हा दलों के बीच पहुंचे. उन्होंने खोड़हा दलों के सदस्यों के साथ सामूहिक नृत्य में भाग लिया और उनका उत्साह बढ़ाया. सांसद की सहभागिता से खोड़हा दलों और ग्रामीणों में उत्साह देखने को मिला. मांदर की थाप और पारंपरिक नृत्य से पूरा जतरा स्थल उत्सवमय हो उठा.
कई गणमान्य लोग और ग्रामीण रहे उपस्थित
कार्यक्रम में आलोक कुमार साहू, अविनाश उरांव, वीरेंद्र यादव, जीवन राम, नवीन शाहदेव, विभिन्न गांवों के पाहन-पुजार, आयोजन समिति के सदस्य तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे. पारंपरिक जतरा के माध्यम से ग्रामीणों ने अपनी सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकता और सामुदायिक परंपराओं का उत्सव मनाया.

