जामताड़ा: एक ओर प्रशासन विकास और बेहतर नागरिक सुविधाओं के दावे करता है, वहीं दूसरी ओर जामताड़ा प्रखंड के गोपालपुर पंचायत अंतर्गत अजय नदी घाट स्थित मुक्तिधाम की बदहाली प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है. मुख्य सड़क से मुक्तिधाम तक महज करीब 200 मीटर पहुंच पथ का निर्माण वर्षों से नहीं हो सका है. कच्चा और गड्ढों से भरा रास्ता बारिश के दिनों में कीचड़ में तब्दील हो जाता है. ऐसे में अंतिम संस्कार के लिए शव लेकर पहुंचने वाले परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.


स्थानीय लोगों का कहना है कि मुक्तिधाम जैसे संवेदनशील और पवित्र स्थल तक पहुंचने के लिए भी लोगों को बदहाल रास्ते से गुजरना पड़ता है. बारिश के बाद स्थिति और भी खराब हो जाती है. कीचड़ और गड्ढों के कारण शव यात्रा में शामिल लोगों को संभलकर चलना पड़ता है. कई बार फिसलने और गिरने का खतरा बना रहता है.
भाजपा नेता अंगभूती झा
न पेयजल, न साफ-सफाई, मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव
समाजसेवियों ने बताया कि मुक्तिधाम परिसर में मूलभूत सुविधाओं का भी घोर अभाव है. अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों के लिए पेयजल तक की समुचित व्यवस्था नहीं है. साफ-सफाई की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है. दुःख की घड़ी में परिजनों को जहां मानसिक पीड़ा से गुजरना पड़ता है, वहीं प्रशासनिक उपेक्षा उनकी परेशानी और बढ़ा देती है.
चेम्बर्स ऑफ़ कोमर्स अध्यक्ष संजय अग्रवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्य सड़क से मुक्तिधाम तक केवल 200 मीटर सड़क निर्माण की मांग कोई बड़ी परियोजना नहीं है. इसके बावजूद बार-बार अधिकारियों से गुहार लगाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है.
‘किसके इंतजार में है प्रशासन?’
जामताड़ा चेंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष संजय अग्रवाल, समाजसेवी सह झामुमो नेत्री चमेली देवी, समाजसेवी सह भाजपा नेता अंगभूती झा, सतसाल गांव निवासी समाजसेवी जयंत कुमार महतो समेत बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है.
झामुमो नेत्री सह समाजसेवी चमेली देवी
समाजसेवियों ने कहा कि मुक्तिधाम किसी एक व्यक्ति या परिवार का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लोगों के लिए महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल है. ऐसे स्थान पर बुनियादी सुविधाओं का अभाव प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है. उन्होंने मांग की कि मुख्य सड़क से मुक्तिधाम तक पक्के पहुंच पथ का निर्माण, नियमित साफ-सफाई तथा पेयजल समेत अन्य आवश्यक सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं. लोगों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द इस दिशा में ठोस पहल नहीं की, तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे.

जर्जर सड़क
स्थानीय लोगों का कहना है कि अंतिम यात्रा के रास्ते को भी यदि प्रशासन सुगम नहीं बना सकता, तो विकास के दावों की वास्तविकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल

