सरायकेला: जमशेदपुर के युवा कारोबारी निखार सबलोक हत्याकांड में पुलिस द्वारा मुख्य साजिशकर्ता बताए गए अशोक कुमार सिंह उर्फ राघव को शुक्रवार को टाटा मुख्य अस्पताल (TMH) से डिस्चार्ज कर दिया गया. अस्पताल से निकलते ही पुलिस ने उसे अपनी कस्टडी में लिया और चांडिल अनुमंडल न्यायालय लेकर पहुंची. न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे सरायकेला मंडल कारा भेजे जाने की प्रक्रिया की जा रही है.


राघव को जेल भेजे जाने की कवायद के बीच एक और चर्चा ने जोर पकड़ लिया है. सूत्रों का दावा है कि वह अपने पहुंच और रसूख के दम पर स्वास्थ्य का हवाला देकर रांची के RIMS में इलाज कराने की कोशिश कर सकता है. हालांकि इस संबंध में फिलहाल किसी सक्षम न्यायिक अथवा चिकित्सा प्राधिकार की ओर से आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.
पूछताछ के दौरान बिगड़ी थी तबीयत, MGM से पहुंचा था TMH
निखार सबलोक की 24 अगस्त को चांडिल थाना क्षेत्र के आसनबनी स्थित टेंथ माइल रिसोर्ट के समीप गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. मामले की जांच के दौरान पुलिस ने अशोक सिंह राघव को कोलकाता से जमशेदपुर लौटते समय बहरागोड़ा क्षेत्र से हिरासत में लिया था. शुरुआत में उससे पूछताछ की गई. इसी दौरान उसकी तबीयत बिगड़ने के बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया. बाद में उसे TMH में भर्ती कराया गया. राघव के अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान ही SIT की जांच आगे बढ़ती रही. CCTV फुटेज, मोबाइल फोन, तकनीकी साक्ष्य और अन्य जानकारियों की कड़ियां जोड़ते हुए पुलिस अंततः उस तक पहुंची. 2 सितंबर को पुलिस ने आधिकारिक तौर पर मामले का खुलासा करते हुए अशोक सिंह राघव को हत्या की साजिश का मुख्य किरदार बताया.
पुलिस का खुलासा- 15 लाख की सुपारी, जमीन और गैंगवार से जुड़ी साजिश
पुलिस के आधिकारिक खुलासे के मुताबिक निखार सबलोक की हत्या के पीछे जमीन विवाद के साथ आपराधिक गिरोहों के बीच वर्चस्व की लड़ाई भी महत्वपूर्ण कारण रही. हत्या के लिए 15 लाख रुपये की सुपारी दिए जाने और उत्तर प्रदेश से शूटर बुलाए जाने की बात सामने आई है. पुलिस जांच में टेंथ माइल रिसोर्ट के पीछे करीब तीन से साढ़े तीन एकड़ जमीन से जुड़े विवाद का एंगल भी सामने आया है. पुलिस ने मामले में अशोक कुमार सिंह उर्फ राघव के अलावा सुनील रजक, रितेश सिंह, सुशील केराई, राज कुमार सिंह उर्फ प्रिंस और अंकित सिंह को गिरफ्तार करने की जानकारी दी थी. इनके पास से हत्या में इस्तेमाल दो पिस्टल, कारतूस, मोबाइल फोन और वारदात में प्रयुक्त लाल रंग की हुंडई i10 कार बरामद करने का दावा किया गया.
राघव के मोबाइल से पुलिस को मिली अहम कड़ी
जांच में अशोक सिंह राघव का मोबाइल भी महत्वपूर्ण साबित हुआ. पुलिस जांच से जुड़ी रिपोर्ट के अनुसार मोबाइल और अन्य तकनीकी साक्ष्यों से साजिश की कई कड़ियां सामने आईं. निखार की गणेश सिंह से बढ़ती नजदीकी और जमीन कारोबार में उसकी सक्रियता भी जांच के केंद्र में रही. जांच में यह बात भी सामने आई कि मामला केवल निखार तक सीमित नहीं था. पुलिस जांच से जुड़ी रिपोर्टों में दावा किया गया कि गैंगवार की इस लड़ाई में कुछ अन्य लोगों को भी निशाना बनाने की योजना थी.
TMH से इंटरव्यू के बाद बढ़ा विवाद
राघव के TMH में भर्ती रहने के दौरान उससे जुड़ा एक कथित इंटरव्यू सामने आने के बाद मामला और चर्चा में आ गया. इसमें निखार सबलोक हत्याकांड का ठीकरा कथित तौर पर दुमका जेल में बंद गैंगस्टर अखिलेश सिंह पर फोड़ने की कोशिश की गई. इसके बाद पुलिस की भूमिका और राघव की अस्पताल में मौजूदगी को लेकर कई तरह के सवाल उठे. सूत्रों के अनुसार पुलिस ने इसके बाद राघव की स्वास्थ्य स्थिति और इलाज से संबंधित दस्तावेजों को लेकर सख्ती दिखाई तथा TMH प्रबंधन से मेडिकल रिपोर्ट मांगी. सूत्रों के अनुसार अस्पताल प्रबंधन पर राघव के प्रभाव अथवा जानबूझकर उसे अस्पताल में रखने की बात सामने आई हालांकि आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
अखिलेश सिंह का नाम उछालने के पीछे क्या है रणनीति ?
इस हत्याकांड का एक दूसरा पहलू अपराध जगत में चल रही चर्चाओं से जुड़ा है. सूत्रों के बीच चर्चा है कि राघव का नाम लंबे समय से गैंगस्टर अखिलेश सिंह के नेटवर्क से जुड़ता रहा है. निखार हत्याकांड के बाद राघव द्वारा कथित तौर पर अखिलेश सिंह का नाम सामने लाने को लेकर भी अलग-अलग अटकलें लगाई जा रही हैं. अपराध जगत में चर्चा है कि निखार की हत्या के पीछे राघव अपनी अलग आपराधिक ताकत स्थापित करना चाहता था और इसके लिए पुराने नेटवर्क से जुड़े लोगों का इस्तेमाल किया गया. साथ ही अब अखिलेश सिंह की संभावित नाराजगी से बचने के लिए राघव जेल जाने से बचना चाहता है- लेकिन यह हिस्सा फिलहाल पुलिस का आधिकारिक निष्कर्ष नहीं, बल्कि अपराध जगत और सूत्रों के बीच चल रही चर्चा है.
जेल जाएगा या रिम्स ? अब अगली कार्रवाई पर निगाह
TMH से छुट्टी मिलने के बाद राघव का चांडिल न्यायालय पहुंचना इस पूरे मामले का अगला महत्वपूर्ण घटनाक्रम है. सामान्य न्यायिक प्रक्रिया के तहत उसे सरायकेला मंडल कारा भेजा जाना है. दूसरी ओर उसके स्वास्थ्य को आधार बनाकर RIMS में इलाज की कोशिश किए जाने की चर्चा भी चल रही है. ऐसे में अब नजर इस बात पर रहेगी कि अदालत और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर राघव को मंडल कारा भेजा जाता है अथवा चिकित्सकीय आवश्यकता सामने आने पर उसे किसी उच्च चिकित्सा संस्थान में भेजने का निर्णय लिया जाता है. निखार सबलोक हत्याकांड अब केवल एक कारोबारी की हत्या तक सीमित मामला नहीं रह गया है. पुलिस की जांच ने जमीन कारोबार, गैंगवार, सुपारी किलिंग और पुराने आपराधिक नेटवर्क की कई परतें खोली हैं. राघव के जेल पहुंचने और शेष फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद इस नेटवर्क से जुड़ी कुछ और कड़ियां सामने आने की संभावना है.

