जामताड़ा: शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान समारोह के लिए जामताड़ा जिले से दो शिक्षकों के नाम राज्य स्तरीय समिति के समक्ष प्रस्तावित किए गए हैं. इनमें राजकीयकृत प्लस टू विद्यालय, मिहिजाम के शिक्षक डॉ. अरुण कुमार वर्मा और उत्क्रमित मध्य विद्यालय सहजपुर, करमाटांड़ के शिक्षक राजन आसरे शामिल हैं. दोनों शिक्षकों ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के साथ सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाई है.


डॉ. अरुण कुमार वर्मा ने ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा की अलख जगाने के लिए उल्लेखनीय कार्य किया. वर्ष 2000 में उन्होंने महज छह विद्यार्थियों के साथ आदर्श उच्च विद्यालय की स्थापना की थी. उनका उद्देश्य ग्रामीण बच्चों को शिक्षा के लिए लंबी दूरी तय करने और पढ़ाई छोड़ने की मजबूरी से बचाना था. लगातार प्रयासों के परिणामस्वरूप आज यह संस्थान सरकारी मान्यता प्राप्त विद्यालय के रूप में विकसित हो चुका है. यहां हर वर्ष 600 से अधिक विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं.
डॉ. वर्मा ने 2,000 से अधिक ग्रामीण बच्चों के लिए शिक्षा के अवसर तैयार करने में भी योगदान दिया. उनके प्रत्यक्ष मार्गदर्शन में अब तक 10 हजार से अधिक विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं. इनमें कई विद्यार्थी आगे चलकर शिक्षक, चिकित्सक, सिविल सर्वेंट, इंजीनियर और अन्य पेशेवर बने हैं. कई विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय स्तर पर खेल के क्षेत्र में भी पहचान बनाई है.
डॉ. अरुण कुमार वर्मा ने अपने शैक्षणिक योगदान को विद्यालय की कक्षा तक सीमित नहीं रखा. उन्होंने किताबों, शोध, लेखों और सार्वजनिक व्याख्यानों के माध्यम से शिक्षा, साहित्य, सामाजिक जागरूकता और हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में भी योगदान दिया. उनकी चर्चित पुस्तकों में ‘मधुशाला फिर से’ वर्ष 2017 और ‘रजनी आमंत्रण’ वर्ष 2024 शामिल हैं.
वहीं उत्क्रमित मध्य विद्यालय सहजपुर, करमाटांड़ के शिक्षक राजन आसरे ने पर्यावरण संरक्षण और बालिका शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है. उन्होंने विद्यालय परिसर में बड़े पैमाने पर पौधरोपण कर विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया. विद्यालय परिसर को हरा-भरा बनाने के साथ बच्चों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने पर भी उन्होंने जोर दिया.
राजन आसरे ने अपने पोषक क्षेत्र की 25 बच्चियों का कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में नामांकन कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. विद्यालय में बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए वे लगातार पोषक क्षेत्र का भ्रमण करते रहे और अभिभावकों से संपर्क कर बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजने के लिए प्रेरित किया.
उन्होंने गुणवत्तापूर्ण, बाल केंद्रित और नवाचारी शिक्षण पद्धति के माध्यम से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार प्रयास किया. इसके अलावा स्वच्छता अभियान, नशामुक्ति अभियान और बाल विवाह उन्मूलन जैसे सामाजिक अभियानों में भी सक्रिय भागीदारी निभाई. इस तरह उन्होंने शिक्षक की भूमिका को कक्षा की चारदीवारी से बाहर समाज तक पहुंचाने का काम किया.
शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण और बालिका शिक्षा के क्षेत्र में दोनों शिक्षकों के योगदान को देखते हुए जिला शिक्षा विभाग ने उनके नाम राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार के लिए प्रस्तावित किए हैं. अब राज्य स्तरीय समिति के निर्णय पर जामताड़ा जिले की नजरें टिकी हैं.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल

