गम्हरिया: सरायकेला- खरसावां जिले के गम्हरिया प्रखंड अंतर्गत जगन्नाथपुर पंचायत के बलरामपुर गांव स्थित विद्या भारती हाई स्कूल में अंतर्राष्ट्रीय विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर शनिवार को भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में आदिवासी संस्कृति, परंपरा, अधिकार, शिक्षा और समाज के सर्वांगीण विकास को लेकर विस्तार से चर्चा की गई.



कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रो. केपी सोरेन और विशिष्ट अतिथि सुकलाल महतो उपस्थित रहे. विद्यालय परिसर में आदिवासी संस्कृति और परंपरा की झलक देखने को मिली. इस दौरान आदिवासी समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, प्रकृति के प्रति जुड़ाव और पारंपरिक जीवन पद्धति के संरक्षण का संकल्प लिया गया.

मुख्य अतिथि प्रोफेसर कालीपद सोरेन ने कहा कि विश्व के विभिन्न देशों में विश्व आदिवासी दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है. यह दिन आदिवासी समाज की पहचान, संस्कृति, अधिकार और विकास के प्रति जागरूकता पैदा करने का महत्वपूर्ण अवसर है.
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना समय की सबसे बड़ी जरूरत है. बच्चे पढ़ेंगे, आगे बढ़ेंगे और शिक्षित होंगे, तभी आदिवासी समाज और मजबूत होगा. उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ अपनी भाषा, संस्कृति, परंपरा और पहचान को भी बचाकर रखना जरूरी है. समाज के बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे लाने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करना चाहिए.
विशिष्ट अतिथि सुकलाल महतो ने कहा कि आदिवासी समाज की जीवन पद्धति और पारंपरिक व्यवस्था प्रकृति से गहराई से जुड़ी हुई है. आदिवासी समाज के पारंपरिक रीति-रिवाज, पूजा पद्धति, देवी-देवता और सामाजिक परंपराओं में प्रकृति के प्रति सम्मान स्पष्ट रूप से दिखाई देता है.

उन्होंने कहा कि आदिवासियों की संस्कृति, परंपरा, अधिकार, रीति-रिवाज, स्वास्थ्य और शिक्षा को संरक्षित करते हुए उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है. उन्होंने झारखंड में रहने वाले सभी वर्गों और धर्मों के लोगों से एकजुट होकर आदिवासी समाज के विकास में सहयोग करने की अपील की. उन्होंने कहा कि आपसी भाईचारे और एकता के साथ ही समाज और राज्य का समग्र विकास संभव है.
कार्यक्रम में विद्यालय के निदेशक सुधांशु जी, हिमांशु जी और प्रधानाचार्य कुणाल जी सहित सभी शिक्षक- शिक्षिकाएं, विद्यार्थी और अभिभावक उपस्थित रहे. विद्यालय प्रबंधन की ओर से आदिवासी समाज के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने और उन्हें आगे बढ़ाने के प्रयासों को प्राथमिकता देने की बात कही गई.
वक्ताओं ने कहा कि आर्थिक और सामाजिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को शिक्षा का बेहतर अवसर उपलब्ध कराना समाज के विकास की मजबूत नींव है. कार्यक्रम के दौरान आदिवासी संस्कृति, परंपरा, प्रकृति संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक अधिकार और युवा पीढ़ी के विकास को लेकर जागरूकता का संदेश दिया गया.
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने आदिवासी समाज की गौरवशाली परंपरा को संरक्षित रखने और शिक्षा के माध्यम से नई पीढ़ी को सशक्त बनाने का संकल्प लिया. पूरे कार्यक्रम में आदिवासी संस्कृति, सामाजिक एकता और शिक्षा के महत्व का संदेश प्रमुखता से सामने आया.





