सरायकेला: नगर पंचायत के उपाध्यक्ष सह झारखंड मुक्ति मोर्चा साहित्य एवं संस्कृति मोर्चा के जिला अध्यक्ष तथा छऊ कलाकार अविनाश कवि ने राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र को लेकर बड़ा और उम्मीद जगाने वाला बयान दिया है. उन्होंने कहा कि वर्षों से लंबित राजकीय छऊ प्रोजेक्ट का सपना अब जल्द साकार होने की उम्मीद है. जिला प्रशासन और राज्य सरकार के स्तर पर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं तथा इस दिशा में सकारात्मक और ठोस आश्वासन मिला है.


अविनाश कवि ने कहा कि राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि हजारों छऊ कलाकारों के भविष्य, सम्मान और सरायकेला की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा विषय है. एक कलाकार होने के नाते वे कलाकारों की पीड़ा, संघर्ष और उम्मीदों को भली-भांति समझते हैं. उन्होंने कहा कि लंबे समय से राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र के विकास तथा छऊ कलाकारों के हितों के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और अब समय आ गया है कि इस संघर्ष को सकारात्मक परिणाम मिले.
उन्होंने विश्वास जताया कि बहुत जल्द राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र, सरायकेला में छऊ प्रोजेक्ट का विधिवत शुभारंभ होगा. इससे कलाकारों को नई पहचान, नए अवसर और बेहतर भविष्य मिलेगा तथा उनके चेहरे पर फिर से मुस्कान लौटेगी.
अविनाश कवि ने कहा कि भले ही वे किसी आधिकारिक समिति का हिस्सा नहीं हैं, लेकिन उन्होंने हमेशा निस्वार्थ भाव से कलाकारों के हितों के लिए कार्य किया है. कलाकारों के अधिकार, सम्मान और उनके भविष्य को लेकर उन्होंने हर मंच पर अपनी आवाज बुलंद की है और आगे भी करते रहेंगे.
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य स्थानीय छऊ कलाकारों को उनका उचित हक, सम्मान और अवसर दिलाना है, ताकि उनका वर्तमान और भविष्य सुरक्षित, समृद्ध और सम्मानजनक बन सके. साथ ही सरायकेला की विश्वप्रसिद्ध छऊ कला और संस्कृति को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित और जीवंत बनाए रखा जा सके.
अविनाश कवि ने कहा कि छऊ केवल एक नृत्य नहीं, बल्कि हमारी पहचान, संस्कृति और विरासत है. कलाकारों का सम्मान और उनका भविष्य सुरक्षित करना हम सभी की जिम्मेदारी है. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राजकीय छऊ नृत्य कला केंद्र में छऊ प्रोजेक्ट का शुभारंभ जल्द होगा. उन्होंने कहा कि कला तभी बचेगी, जब कलाकार बचेगा, और कलाकार तभी आगे बढ़ेगा, जब उसे उसका उचित सम्मान, अधिकार और अवसर मिलेगा. स्थानीय कलाकारों के हितों की लड़ाई वे आगे भी पूरी मजबूती और ईमानदारी से लड़ते रहेंगे.
प्रमोद सिंह (संपादक)

