कांड्रा: रेलवे जंक्शन परिसर में रेलवे कर्मचारियों की कथित लापरवाही और यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. शनिवार को स्टेशन के टिकट बुकिंग काउंटर के बगल में खड़े ग्रेनाइट स्लैब अचानक गिरने से बलरामपुर निवासी बिहारी सिंह घायल हो गए. बताया जाता है कि बिहारी सिंह कांड्रा में रहकर फूल बेचने का व्यवसाय करते हैं. इस हादसे में उन्हें चोटें आईं, जिसके बाद तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता थी.


प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार, घटना के बाद घायल व्यक्ति की मदद के लिए आरपीएफ को सूचना दी गई. लेकिन आरोप है कि सूचना देने के बावजूद करीब एक घंटे तक रेलवे की ओर से न तो कोई समुचित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई और न ही घायल को अस्पताल पहुंचाने की कोई त्वरित व्यवस्था की गई. आखिरकार स्टेशन परिसर में मौजूद ऑटो चालकों ने मानवीय पहल करते हुए मदद का हाथ बढ़ाया. उनकी सहायता से एंबुलेंस की व्यवस्था कर घायल बिहारी सिंह को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया.
रेलवे की व्यवस्था पर उठे सवाल
रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक और व्यस्त परिसर में टिकट काउंटर के समीप ग्रेनाइट स्लैब का गिरना स्टेशन परिसर में निर्माण सामग्री की मजबूती और रखरखाव पर सवाल खड़े करता है. सवाल यह भी है कि घटना के बाद रेलवे कर्मचारियों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों ने तत्काल सहायता उपलब्ध कराने में तत्परता क्यों नहीं दिखाई.
ऑटो चालकों ने निभाई इंसानियत, रेलवे की भूमिका पर सवाल
इस घटना में जहां रेलवे की ओर से कथित तौर पर समय पर सहायता नहीं मिलने की बात सामने आई है, वहीं स्थानीय ऑटो चालकों ने घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. ऐसे में सवाल उठता है कि रेलवे स्टेशन पर किसी यात्री या आम नागरिक के साथ दुर्घटना होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी किसकी है.
स्थानीय लोगों ने रेलवे के वरीय अधिकारियों से मामले की जांच कराने, ग्रेनाइट स्लैब गिरने के कारणों का पता लगाने और संबंधित कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है. साथ ही स्टेशन परिसर में रखे अन्य स्लैब और निर्माण कार्यों की सुरक्षा जांच कराने की भी आवश्यकता जताई है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो.
*अब देखना यह है कि रेलवे प्रशासन इस घटना को कितनी गंभीरता से लेता है और घायल बिहारी सिंह को समय पर सहायता नहीं मिलने के मामले में क्या कार्रवाई करता है.*
रिपोर्ट: विपिन वार्ष्णेय

