खरसावां: हरिभंजा में शुक्रवार को भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र, बहन सुभद्रा और सुदर्शन की बाहुड़ा रथयात्रा श्रद्धा, आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुई. मौसीबाड़ी स्थित गुंडिचा मंदिर में नौ दिनों के प्रवास के बाद चतुर्धा मूर्ति भव्य शोभायात्रा के साथ श्रीमंदिर लौटी. “जय जगन्नाथ” के गगनभेदी जयघोष. शंखध्वनि और पारंपरिक हुल-हुली के बीच सैकड़ों श्रद्धालुओं ने नंदीघोष रथ की रस्सी खींचकर महाप्रभु को श्रीमंदिर तक पहुंचाया.



रथ यात्रा के दौरान पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. जगह-जगह पुष्पवर्षा कर महाप्रभु का स्वागत किया गया. भक्ति और उल्लास के माहौल में श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ रथ के साथ चलते रहे. श्रीमंदिर पहुंचने पर महाप्रभु की महाआरती की गई और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच चतुर्धा मूर्ति को विधि-विधान के साथ रत्न सिंहासन पर विराजमान कराया गया.
मुख्य पुरोहित पंडित प्रदीप कुमार दाश, भरत त्रिपाठी एवं अन्य सेवायतों ने सभी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए. भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया. अधरपणा की परंपरा निभाई गई तथा छप्पन भोग अर्पित कर महाप्रभु की पूजा-अर्चना की गई.
बाहुड़ा यात्रा की सबसे आकर्षक परंपरा मां लक्ष्मी का मान-मनौवल भी पूरे विधि-विधान के साथ निभाया गया. धार्मिक मान्यता के अनुसार नौ दिनों तक मौसीबाड़ी में रहने से नाराज मां लक्ष्मी श्रीमंदिर का द्वार बंद कर देती हैं. इसके बाद भगवान जगन्नाथ और मां लक्ष्मी के बीच प्रतीकात्मक मान-मनौवल होता है. अंत में भगवान मां लक्ष्मी को रसगुल्ला भेंट कर उन्हें प्रसन्न करते हैं. इसके बाद श्रद्धालुओं के बीच रसगुल्ला प्रसाद का वितरण किया गया.
इस अवसर पर हरिभंजा के जमींदार विद्या विनोद सिंहदेव, संजय सिंहदेव, राजेश सिंहदेव, पृथ्वीराज सिंहदेव सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु और सेवायत उपस्थित रहे. श्रद्धालुओं ने रथ खींचकर स्वयं को सौभाग्यशाली बताया और पूरे आयोजन के दौरान मंदिर परिसर जय जगन्नाथ के जयघोष से गूंजता रहा.
बाहुड़ा रथयात्रा के साथ हरिभंजा का वार्षिक रथ महोत्सव विधिवत संपन्न हो गया. अब भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, देवी सुभद्रा और सुदर्शन वर्षभर श्रीमंदिर में विराजमान रहेंगे. अगले वर्ष रथयात्रा के अवसर पर महाप्रभु पुनः भक्तों को नगर भ्रमण का दिव्य दर्शन देंगे.





