
जामताड़ा: शहर के चर्चित निजी अस्पताल पोपुलर नर्सिंग होम में पीसीपीएनडीटी एक्ट (Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques Act) के अनुपालन में कमी के आरोप के बाद अल्ट्रासाउंड कक्ष को सील किए जाने की कार्रवाई अब गंभीर विवादों में घिर गई है। इस पूरे मामले ने प्रशासनिक प्रक्रिया और स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई अनुमंडल पदाधिकारी के निर्देश पर की गई, जिसमें एमओआईसी, सदर अस्पताल के डीएस और डीपीएम की मौजूदगी बताई जा रही है। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम को लेकर न तो उपायुक्त कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी दी गई और न ही संबंधित अधिकारियों ने इस पर खुलकर बयान दिया है। जामताड़ा के अनुमंडल पदाधिकारी अनंत कुमार, एमओआईसी निलेश कुमार और स्वास्थ्य विभाग के डीपीएम प्रदीप महतो इस मामले पर टिप्पणी करने से बचते नजर आए।

एमओआईसी निलेश कुमार ने केवल इतना स्वीकार किया कि एसडीओ के निर्देश पर पोपुलर नर्सिंग होम में पीसीपीएनडीटी एक्ट के अनुपालन में कमी पाए जाने के बाद अल्ट्रासाउंड कक्ष को सील किया गया है।
मामले में नया मोड़ तब आया जब सिविल सर्जन डॉ शिवप्रसाद मिश्रा ने जानकारी दी कि अल्ट्रासाउंड मशीन के रिन्यूअल से जुड़े तीन आवेदन विभाग में लंबित हैं। वहीं विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत प्रत्येक माह समीक्षा बैठक आयोजित की जाती है। जामताड़ा में 9 अप्रैल, 7 मई और 11 जून को बैठकें हुईं, लेकिन लंबित आवेदनों पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया।
नियमों के अनुसार, आवेदन प्राप्त होने के 90 दिनों के भीतर एडवाइजरी कमेटी और उपयुक्त प्राधिकारी को रिन्यूअल या अस्वीकृति पर निर्णय लेना अनिवार्य है। यदि निर्धारित समय सीमा में कोई निर्णय नहीं लिया जाता है तो संबंधित केंद्र को स्वतः पंजीकृत माना जाता है।
ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब आवेदन लंबित थे और 90 दिनों की अवधि में कोई निर्णय नहीं लिया गया, तो अल्ट्रासाउंड मशीन को सील करने की कार्रवाई किस कानूनी आधार पर की गई। यह पूरा घटनाक्रम प्रशासनिक पारदर्शिता और वैधानिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
अब देखना होगा कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देता है, क्योंकि यह मामला केवल एक अस्पताल की कार्रवाई तक सीमित नहीं है बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही और कानून के पालन से जुड़ा हुआ है।
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल


