सरायकेला: चाईबासा महिला थाना में दर्ज दुष्कर्म मामले और न्यायालय से जारी गैर-जमानती वारंट के बाद झारखंड सरकार ने सरायकेला नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) समीर बोदरा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है. सरकार की इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है.


प्राप्त जानकारी के अनुसार उपायुक्त सरायकेला-खरसावां के प्रतिवेदन तथा सदर महिला थाना, चाईबासा की रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई है. समीर बोदरा के विरुद्ध सदर महिला थाना, चाईबासा कांड संख्या-03/2026, दिनांक 28 फरवरी 2026 में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज है. मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय द्वारा उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी किया गया है.
सरकारी आदेश में कहा गया है कि वारंट जारी होने के बावजूद समीर बोदरा गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार हैं. सरकार ने इसे एक लोक सेवक के लिए गंभीर और अनुचित आचरण माना है. आदेश में उल्लेख किया गया है कि एक जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी का कानून से बचने के लिए फरार रहना सरकारी सेवा की मर्यादा और आचरण नियमों के विपरीत है.
झारखंड सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2016 की कंडिका-9 तथा झारखंड सेवा संहिता के नियम-100 के तहत समीर बोदरा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है. निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय उपायुक्त कार्यालय, सरायकेला-खरसावां निर्धारित किया गया है. नियमानुसार उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता भी प्रदान किया जाएगा.
सरकार ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि एक लोक सेवक के रूप में समीर बोदरा का आचरण सेवा की गरिमा और पद की प्रतिष्ठा के अनुरूप नहीं पाया गया. उनके विरुद्ध लगे आरोपों और फरार रहने की स्थिति को प्रशासनिक दृष्टि से गंभीर माना गया है.
इस कार्रवाई के बाद नगर पंचायत सरायकेला सहित प्रशासनिक गलियारों में मामले को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. लोगों के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद आरोपी अधिकारी अब तक गिरफ्तारी से कैसे बचता रहा.
प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि सरकार का यह कदम कानून और सेवा अनुशासन के प्रति सख्त संदेश है. फिलहाल पूरे मामले पर लोगों की नजरें टिकी हैं और फरार अधिकारी की गिरफ्तारी तथा आगे की कानूनी कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है.
रिपोर्ट: प्रमोद सिंह



