जामताड़ा: जिले के नारायणपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत रामपुर और आसपास के इलाकों में एक बार फिर पत्थर खनन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. क्षेत्र में पहले से कई पत्थर खदान संचालित हैं और अब नए सिरे से खनन गतिविधियों को बढ़ाने की तैयारी की खबरों ने ग्रामीणों और किसानों की चिंता बढ़ा दी है. सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या विकास और खनन की दौड़ में किसानों की उपजाऊ जमीन और भविष्य धूल में दब जाएगा.

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि प्रस्तावित पत्थर खदानों से भारी वाहनों के आवागमन के लिए खेती योग्य रैयती जमीनों के बीच से रास्ता बनाने की योजना तैयार की जा रही है. बताया जा रहा है कि पबिया पंचायत के सिकदारडीह- मदनाडीह पंचायत के लोकोनिया मुख्य मार्ग तक पहुंचने के लिए सिंचाई और धान की खेती वाली जमीनों का इस्तेमाल करने की कोशिश हो रही है. किसानों का कहना है कि कुछ जमीन मालिकों को अलग-अलग प्रलोभन देकर रास्ता देने के लिए तैयार किया जा रहा है.
ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि खेतों के बीच से पत्थर लदे भारी वाहनों का आवागमन शुरू हुआ तो उड़ने वाली धूल और डस्ट से फसलें बर्बाद हो जाएंगी. साथ ही खदानों से निकलने वाली मिट्टी खेतों में भरने लगेगी, जिससे उपजाऊ जमीन धीरे- धीरे बंजर होने का खतरा बढ़ जाएगा. क्षेत्र के अधिकांश परिवार खेती पर निर्भर हैं और यहां मुख्य रूप से धान की खेती होती है. ऐसे में माइनिंग गतिविधियों के विस्तार से किसानों की आजीविका पर सीधा असर पड़ सकता है.
ग्रामीणों ने पर्यावरणीय नुकसान को लेकर भी चिंता जताई है. लोगों का कहना है कि लगातार खनन से जल, जंगल और जमीन पर बुरा प्रभाव पड़ेगा और क्षेत्र का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ सकता है. ग्रामीणों ने यह भी सवाल उठाया कि पहले संचालित कई पत्थर खदानों से निकाले गए पत्थरों के बाद बने बड़े- बड़े गड्ढों की अब तक भराई नहीं कराई गई है. ऐसे में नए खनन कार्य शुरू होने पर भविष्य में स्थिति और गंभीर हो सकती है.
किसानों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि खेती योग्य जमीनों को बचाने के लिए प्रस्तावित खनन लीज की निष्पक्ष जांच कराई जाए. साथ ही जनहित और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए ऐसे लीज धारकों की अनुमति रद्द करने की मांग भी उठाई गई है. क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर लगातार चर्चाएं जारी हैं और लोग प्रशासन से ठोस कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं.
ग्रामीणों का कहना है कि अगर खेत सुरक्षित रहेंगे तभी गांव और किसानों का भविष्य सुरक्षित रहेगा, वरना खनन की धूल में खेती और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य दोनों दब जाएंगे.
रिपोर्ट: मनीष बर्णवाल



