आदित्यपुर: लंबे इंतजार के बाद आदित्यपुर वासियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. सीतारामपुर डैम के पास बने 30 एमएलडी वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट से आरआईटी थाना क्षेत्र की पानी टंकी संख्या 8 और 9 में पानी भरने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. इसके बाद क्रमवार करीब 16 से 20 हजार घरेलू कनेक्शन धारकों के घरों तक परीक्षण के तौर पर जलापूर्ति शुरू करने की तैयारी है.

वहीं 60 एमएलडी सापड़ा वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट का कार्य भी तेजी से जारी है. प्लांट तक 11000 वोल्ट बिजली आपूर्ति के लिए वन विभाग से अनापत्ति लगभग मिल चुकी है और जल्द ही बिजली पहुंचाने का कार्य शुरू होगा. इस परियोजना के अगस्त 2026 तक पूर्ण होने की संभावना जताई जा रही है.
बता दें कि दोनों जलापूर्ति योजनाएं करीब 395 करोड़ रुपये की लागत से शुरू की गई थीं, लेकिन वर्षों तक कार्य लंबित रहा. इसके बाद सामाजिक संस्था जन कल्याण मोर्चा द्वारा झारखंड उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करने के बाद काम में तेजी आई. इस परियोजना को गति देने में वर्तमान उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह के प्रयासों की सराहना की जा रही है, जिन्होंने समयबद्ध लक्ष्य तय कर कार्य को आगे बढ़ाया.
सामाजिक संगठन ने मांग की है कि जब तक सापड़ा प्लांट पूरी तरह तैयार नहीं हो जाता, तब तक आदित्यपुर के ड्राई जोन क्षेत्रों में भी सीतारामपुर प्लांट से जलापूर्ति सुनिश्चित की जाए.
प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ अशोक कुमार ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि जन कल्याण मोर्चा के प्रयासों के बिना यह योजना संभव नहीं हो पाती. उन्होंने नगर निगम के चुने हुए जनप्रतिनिधियों से जल्द से जल्द जलापूर्ति योजना को पूरी तरह धरातल पर उतारने की अपील की.
सामाजिक संस्था जनकल्याण मोर्चा के अध्यक्ष सह अधिवक्ता ओमप्रकाश ने झारखंड उच्च न्यायलय एवं उपयुक्त नीतीश कुमार सिंह के प्रयासों की सराहना की और कहा कि झारखंड हाई कोर्ट से मिले निर्देश के बाद उपायुक्त ने जलापूर्ति योजना के काम में तेजी लाने के लिए निजी तौर पर प्रयास किया और सभी अड़चनों को दूर करने में तत्परता दिखाई. तब जाकर यह योजना धरातल पर उतरता नजर आ रहा है. उन्होंने कहा कि नगर निगम प्रशासन को प्राथमिकता के तौर पर अविलंब योजना में तेजी लाने की जरूरत है, ताकि प्रचंड गर्मी में होने वाले परेशानियों से बचा जा सके. उन्होंने कहा कि आदित्यपुर नगर निगम का वार्ड 17 ड्राई जोन है. वहां पानी की घोर किल्लत होती है निगम प्रशासन को इस दिशा में पहल करने की जरूरत है.

