सरायकेला/ Pramod Singh नगर पंचायत के प्रशासक शशि शेखर सुमन के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच का निर्देश जारी होने के बाद उनके व्यवहार में बौखलाहट साफ नजर आने लगी है. विभागीय जांच से डरे प्रशासक अब अपने ही कार्यालय के अधीनस्थ कर्मचारियों को निशाना बनाने लगे हैं.

मिली जानकारी के अनुसार प्रशासक ने नगर पंचायत कार्यालय में कार्यरत तीन कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस भेजते हुए सेवा समाप्ति की चेतावनी दी है. इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है. नगर प्रशासक के भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाने वाले नगर पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष मनोज चौधरी ने आरोप लगाया कि प्रशासक अपने भ्रष्टाचार के साक्ष्य को छुपाने के लिए उन कर्मियों को प्रताड़ित कर रहे हैं जो उनके गलत कार्यों में सहभागी नहीं बने. उन्होंने कहा कि कारण पृच्छा नोटिस के माध्यम से कर्मियों को डरा-धमका कर सच्चाई पर पर्दा डालने का प्रयास हो रहा है.
मनोज चौधरी ने यह भी आरोप लगाया कि नगर प्रशासक और सिटी मैनेजर महेश जारिका की मिलीभगत से पूरे भ्रष्टाचार का ताना- बाना बुना गया है. उन्होंने मांग की कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, प्रशासक को नगर पंचायत से दूर रखा जाए, ताकि निष्पक्ष जांच हो सके.
इधर झामुमो के जिला उपाध्यक्ष भोला महांती ने भी प्रशासक पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा कि प्रशासक कार्यालय में तानाशाही रवैया अपना रहे हैं और अपने अधीनस्थ कर्मियों को हथकंडों के जरिए प्रताड़ित कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि वे इस मामले को लेकर मंगलवार को रांची में विभागीय मंत्री और मुख्यमंत्री से मुलाकात कर पूरे प्रकरण की जानकारी देंगे. सरायकेला में नगर प्रशासन से जुड़े इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है. अब सबकी निगाहें जांच प्रक्रिया और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं.

