सरायकेला/ Bipin Varshney जिले में बालू माफियाओं के एक बड़े खेल का खुलासा हुआ है. खेल भी ऐसा जिसमें डाक विभाग भले चकमा खा जाए मगर बालू माफिया एकदम पते पर पहुंच रहे हैं. मामला बीती रात का है. जहां कांड्रा थाना अंतर्गत अल्ट्राटेक मिक्सचर प्लांट में देर रात बिना वैध चालन के बालू खाली करने पहुंचे एक टिपर ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

टिपर संख्या JH 01 FU 5184 बिना हार्ड कॉपी चालन के प्लांट परिसर में प्रवेश कर गया. ड्राइवर द्वारा मोबाइल पर दिखाया गया चालन कम्युनिक्यू कांक्रीट महादेव इंटरप्राइजेज, शहरबेडा (पोस्ट बुरूडीह), थाना आदित्यपुर के नाम पर था. जो कि खदान का नाम गोपाल कुमार सिंह गया बिहार के नाम से आया हुआ दिखाया गया है.
चौंकाने वाली बात यह है कि चालन में 933.5 CFT बालू दर्ज है, जबकि मौके के निरीक्षण में अंदेशा जताया जा रहा है कि टिपर में कम से कम 1500 CFT तक बालू लोड हो सकता है. यदि इसकी सही से जांच कराई जाए तो अवैध खनन और ओवरलोडिंग का बड़ा मामला सामने आ सकता है.
मजे की बात ये है कि फर्जी चालान और फर्जी पता होने के बाद भी वाहन को अल्ट्राटेक पिंडराबेड़ा प्लांट में एंट्री दी गई, कंपनी स्टाफ द्वारा वजन भी कराया गया और उसे अनलोडिंग पॉइंट पर लगा दिया गया. जब ड्राइवर से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि बालू “निर्मला के अकाउंट में खाली करना है” और उसे सचिन कुमार जायसवाल के निर्देश पर भेजा गया है.
कंपनी के स्टाफ ने इस प्रकरण में अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि वे मामले की जानकारी वेंडर से लेकर बताएंगे. वेंडर से संपर्क के बाद दावा किया गया कि “गाड़ी गलती से यहां आ गई है” और उसे वापस लौटाने की बात कही गई. इसके बाबजूद टीपर यहीं खाली किया गया.
*बड़ा सवाल:*
ड्राइवर के अनुसार यह बालू बिहार से आया है. लेकिन, यदि बालू बिहार से लाया गया है तो टिपर से पानी कैसे चू रहा था ?
स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी से ताज़ा लोड किए गए बालू में ही पानी टपकता है, जिससे वाहन के लोडिंग स्थान को लेकर गंभीर संदेह और गहरा हो जाता है.
घटना के बाद इस मामले की जानकारी देने के लिए खनन पदाधिकारी एवं खनन इंस्पेक्टर से संपर्क की कोशिश की गई, लेकिन दोनों अधिकारियों ने फोन रिसीव नहीं किया.
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ईचागढ़ थाना क्षेत्र में अवैध बालू खनन और ट्रांसपोर्टिंग के विरोध में हंगामा हुआ था. जेएलकेएम नेता तरुण महतो द्वारा अवैध खनन के खिलाफ आवाज उठाने पर ईचागढ़ थाना ने उन्हें जेल भेज दिया था. इसके बावजूद बालू माफियाओं का मनोबल कम होता नहीं दिख रहा है और वे खुलेआम अवैध धंधा कर रहे हैं. बड़ा सवाल ये है कि इस मामले की जांच कौन करेगा ? जिसके जिम्मे अवैध बालू खनन, परिवहन और भंडारण के जांच की जिम्मेदारी है वही सूचना पर फोन रिसीव नहीं करते तो सरकारी राजस्व लूट की रखवाली की उम्मीद किससे की जाए !

