सरायकेला/ Pramod Singh नगर क्षेत्र में रसोई गैस आपूर्ति व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. एक ओर आम उपभोक्ता समय पर घरेलू एलपीजी सिलेंडर के लिए जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कालाबाजारी का खेल खुलेआम जारी होने के आरोप सामने आ रहे हैं.

जानकारी के अनुसार, उपभोक्ताओं को गैस एजेंसियों पर लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है, इसके बावजूद सिलेंडर की आपूर्ति समय पर नहीं हो पा रही है. कई लोगों का कहना है कि बुकिंग के बाद भी 10 से 15 दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है.
इसी अव्यवस्था का फायदा उठाकर कथित दलाल सक्रिय हो गए हैं. आरोप है कि ये लोग घरेलू गैस सिलेंडर को अवैध रूप से जमा कर जरूरतमंद लोगों को 2500 से 3000 रुपये तक में बेच रहे हैं. यह कालाबाजारी घर- घर तक पहुंचकर की जा रही है, जिससे इनके हौसले और बढ़ते नजर आ रहे हैं.
ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में यह समस्या तेजी से फैलती दिख रही है. स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ गैस एजेंसी कर्मियों की मिलीभगत से सप्लाई प्रभावित की जा रही है, ताकि कालाबाजारी को बढ़ावा मिल सके. हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
महिलाओं में इस समस्या को लेकर खासा आक्रोश है. उनका कहना है कि रसोई का बजट बिगड़ गया है और कई बार खाना बनाने में भी परेशानी हो रही है. उज्ज्वला योजना के तहत कनेक्शन मिलने के बावजूद गैस भरवाना मुश्किल होता जा रहा है.
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि इतने बड़े स्तर पर कालाबाजारी होने के बावजूद प्रशासन की कार्रवाई क्यों नजर नहीं आ रही है. क्या प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं है या फिर कार्रवाई में ढिलाई बरती जा रही है.
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए. साथ ही गैस एजेंसियों की कार्यप्रणाली की भी जांच की मांग उठाई गई है, ताकि आम उपभोक्ताओं को समय पर राहत मिल सके.
फिलहाल, सरायकेला में गैस संकट और कालाबाजारी ने आम जनता को दोहरी मार झेलने पर मजबूर कर दिया है. अब नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है.

