राजनगर: बोतरबेड़ा गांव में करीब 80 वर्षों से चली आ रही फुटबॉल की परंपरा इस वर्ष भी पूरे उत्साह के साथ देखने को मिली. सितंबर माह के दूसरे रविवार को आयोजित दो दिवसीय फुटबॉल प्रतियोगिता में कुल 48 टीमों ने हिस्सा लिया. रोमांचक मुकाबलों को देखने के लिए मैदान में हजारों खेलप्रेमियों की भीड़ उमड़ी.


फाइनल मुकाबला गुरमा एफसी और पानतांति कल्याण समिति के बीच खेला गया. दोनों टीमों के बीच जोरदार मुकाबले के बाद पानतांति कल्याण समिति ने जीत दर्ज कर खिताब अपने नाम किया, जबकि गुरमा एफसी उपविजेता रही. विजेता टीम को एक खस्सी और 35 हजार रुपये नकद तथा उपविजेता टीम को एक खस्सी और 25 हजार रुपये नकद देकर पुरस्कृत किया गया.

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सिंहभूम सांसद जोबा माझी शामिल हुईं. विशिष्ट अतिथि झामुमो केंद्रीय सदस्य कृष्णा बास्के और समाजसेवी कालीपद सोरेन समेत अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे. अतिथियों ने खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर उनका उत्साह बढ़ाया.
*1946 से चली आ रही फुटबॉल की परंपरा*
आयोजकों के अनुसार बोतरबेड़ा में फुटबॉल प्रतियोगिता की शुरुआत वर्ष 1946 में हुई थी. तभी से प्रत्येक वर्ष सितंबर माह के दूसरे रविवार को प्रतियोगिता आयोजित करने की परंपरा चली आ रही है. करीब आठ दशक बाद भी ग्रामीणों और युवाओं में इस आयोजन को लेकर उत्साह बरकरार है.
प्रतियोगिता को सफल बनाने में आयोजन समिति के अध्यक्ष रामलाल बेसरा, सचिव शांखो मुर्मू, कोषाध्यक्ष चैतन हांसदा के अलावा सुरेश मुर्मू, कोकिल प्रमाणिक, बबलू गोप, मिर्जा सोरेन, राजीव सोरेन, गोपाल मुर्मू सहित ग्रामीणों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
हजारों दर्शकों की मौजूदगी और 48 टीमों की भागीदारी ने एक बार फिर साबित किया कि बोतरबेड़ा में फुटबॉल महज खेल नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा और ग्रामीणों के उत्सव का हिस्सा है.
रिपोर्ट: सरिता महतो

