
सरायकेला: रजो संक्रांति के अवसर पर राजनगर प्रखंड के शहीद ग्राम मतकमबेड़ा में आयोजित ऐतिहासिक मेले का उद्घाटन बुधवार को सिंहभूम सांसद जोबा माझी ने विधिवत किया. इस अवसर पर झामुमो नेता कालीपद सोरेन सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, श्रद्धालु और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे.


मेले को संबोधित करते हुए सांसद जोबा माझी ने शहीद ग्राम डिबा के ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि यह गांव झारखंड के अमर शहीद डिबा किशुन की जन्मभूमि होने के साथ-साथ प्राचीन शिव मंदिर और पौराणिक शिवलिंग के लिए भी प्रसिद्ध है. ऐसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को संरक्षित करना हम सभी की जिम्मेदारी है.

उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार शहीदों को सम्मान देने के साथ- साथ राज्य की संस्कृति, परंपरा और ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने का भी कार्य कर रही है. राज्य सरकार के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने क्षेत्रवासियों से अपनी सभ्यता, संस्कृति और विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का आह्वान किया. सांसद ने रजो संक्रांति की शुभकामनाएं देते हुए गांव में स्थापित नए ट्रांसफार्मर का भी उद्घाटन किया.
इस मौके पर झामुमो नेता केपी सोरेन ने केंद्र सरकार से झारखंड के ऐतिहासिक, धार्मिक और शहीद स्थलों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की मांग की. उन्होंने कहा कि देश के अन्य राज्यों के धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों की तरह झारखंड के गौरवशाली स्थलों को भी विकसित किया जाना चाहिए और उन्हें इतिहास के पन्नों में उचित स्थान मिलना चाहिए.

उन्होंने कहा कि झारखंड के अनेक शहीदों और ऐतिहासिक स्थलों को आज भी वह पहचान नहीं मिल सकी है, जिसके वे हकदार हैं. इसके कारण नई पीढ़ी अपने पूर्वजों के संघर्ष, बलिदान और इतिहास से पूरी तरह परिचित नहीं हो पा रही है. शहीद ग्राम डिबा को उन्होंने क्षेत्र की अमूल्य धरोहर बताते हुए इसके संरक्षण और विकास की आवश्यकता पर बल दिया.
उल्लेखनीय है कि शहीद ग्राम मतकमबेड़ा में प्रत्येक वर्ष रजो संक्रांति के अवसर पर विशाल मेला आयोजित किया जाता है. यहां स्थित पौराणिक शिवलिंग के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए झारखंड सहित पड़ोसी राज्यों से हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं. मेले में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है.

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यहां सच्चे मन से मांगी गई मुराद अवश्य पूरी होती है. अमर शहीद डिबा किशुन की जन्मभूमि होने के कारण इस गांव का ऐतिहासिक महत्व भी अत्यंत विशेष माना जाता है. यही वजह है कि यह मेला केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि झारखंड की सांस्कृतिक पहचान और गौरव का प्रतीक भी बन चुका है. इस दौरान जनप्रतिनिधियों ने शहीद ग्राम में बन रहे शहीद डिबा किशुन की प्रतिमा का और प्रतिमास्थल का निरिक्षण भी किया.
रिपोर्ट: रासबिहारी मंडल


