जमशेदपुर: नई दिल्ली में आयोजित जनजाति सांस्कृतिक समागम में भाग लेने जा रहे सैकड़ों लोगों के जत्थे को शुक्रवार को झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने रवाना किया. जनजातीय सुरक्षा मंच के तत्वावधान में लाल किले में आयोजित होने वाले इस समागम में देशभर से लाखों आदिवासी समुदाय के लोगों के शामिल होने की संभावना है.

इस मौके पर चम्पाई सोरेन ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी आदिवासी संस्कृति और परंपराओं की रक्षा के लिए कृतसंकल्पित है. उन्होंने कांग्रेस पर आदिवासियों की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए कहा कि झारखंड आंदोलन के दौरान आदिवासियों और मूलवासियों पर लाठीचार्ज तथा गोली चलाने की घटनाएं कांग्रेस शासन में हुई थीं.

उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस वास्तव में आदिवासियों की हितैषी होती तो अंग्रेजों के समय से चले आ रहे आदिवासी धर्म कोड को वर्ष 1961 की जनगणना से नहीं हटाया जाता. उन्होंने बाबा कार्तिक उरांव का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1967 में उन्होंने संसद में डिलिस्टिंग प्रस्ताव रखा था, जिसमें धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों को अनुसूचित जनजाति आरक्षण से बाहर करने की मांग की गई थी.
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि संसद की संयुक्त समिति ने वर्ष 1969 में अपनी सिफारिशों में यह कहा था कि जो व्यक्ति आदिवासी परंपराओं को छोड़कर अन्य धर्म अपना चुका है, उसे अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं माना जाना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने इस विषय को ठंडे बस्ते में डाल दिया.
चम्पाई सोरेन ने कहा कि भाजपा सरकार ने आदिवासी समाज के विकास के लिए एकलव्य विद्यालय, जनजातीय गौरव दिवस और पीएम जनमन योजना जैसी कई पहल की हैं. उन्होंने कहा कि पहली बार भाजपा शासनकाल में ही एक आदिवासी महिला को देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठने का गौरव मिला.
उन्होंने झारखंड कांग्रेस द्वारा जनजाति सांस्कृतिक समागम के बहिष्कार की अपील की भी आलोचना की और कहा कि आदिवासी समाज अपनी संस्कृति, परंपरा और पूजा स्थलों की रक्षा के लिए जागरूक हो रहा है. ज्ञात हो कि 24 मई को नई दिल्ली के लाल किले में आयोजित जनजाति सांस्कृतिक समागम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई प्रमुख आदिवासी नेता शामिल होंगे.



